अभिषेक बनर्जी फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, विदेश में आंखों के इलाज की मांग पर हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

अभिषेक बनर्जी फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, विदेश में आंखों के इलाज की मांग पर हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी की विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने की कोशिश एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बनर्जी ने अब शीर्ष अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि वह अमेरिका में उसी विशेषज्ञ से अपना इलाज जारी रखना चाहते हैं, जिसने पहले उनकी आंख का ऑपरेशन किया था। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार विदेश जाने की अनुमति का विरोध कर रही है। सरकार का तर्क है कि ऐसा कोई मेडिकल इमरजेंसी का आधार सामने नहीं आया है, जिसके लिए उन्हें विदेश जाना जरूरी हो।

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, अब सुप्रीम कोर्ट पर नजर

अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 5 अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने की उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। यह मामला उस आपराधिक केस से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक भड़काऊ भाषण को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है।

इस मामले में हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी राहत के साथ विदेश यात्रा पर भी शर्त लगाई थी। इसके बाद बनर्जी ने विदेश में इलाज की अनुमति मांगी थी, लेकिन अदालत ने उन्हें राज्य के सरकारी SSKM Hospital और Institute of Post Graduate Medical Education & Research (IPGME&R) में इलाज कराने का विकल्प दिया।

मामला यहीं नहीं रुका। बनर्जी इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने हाईकोर्ट के 20 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विदेश जाने की तत्काल अनुमति देने से इनकार किया गया था। 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका का निपटारा करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट से मामले पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया था।

मेडिकल बोर्ड के सामने पेश न होना बना बड़ा मुद्दा

5 अगस्त को हाईकोर्ट ने बनर्जी की अर्जी खारिज करते हुए मेडिकल बोर्ड के सामने उनके पेश न होने को अहम आधार बनाया। अदालत ने कहा कि अगर वह मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होते, तो बोर्ड की राय से यह तय करने में मदद मिल सकती थी कि उन्हें वास्तव में विदेश जाकर इलाज कराने की जरूरत है या नहीं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद मेडिकल विशेषज्ञ नहीं है। उसके सामने इस समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बनर्जी को इलाज की जरूरत है या नहीं और उसके बाद यह तय होगा कि इलाज कहां होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि मरीज को अपनी पसंद के डॉक्टर या अस्पताल में इलाज कराने का पूर्ण अधिकार है। अदालत ने मामले में लंबित कई आपराधिक मुकदमों और जारी जांच का भी उल्लेख किया।

अमेरिका के डॉक्टर से इलाज जारी रखना चाहते हैं बनर्जी

बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अदालत में कहा था कि TMC सांसद अमेरिका के उस विशेषज्ञ से इलाज जारी रखना चाहते हैं, जिसने पहले उनका ऑपरेशन किया था। उनका पक्ष यह भी था कि बनर्जी SSKM Hospital में इलाज कराने के इच्छुक नहीं हैं।

यानी विवाद सिर्फ विदेश यात्रा की अनुमति तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह भी है कि इलाज के लिए डॉक्टर और मेडिकल संस्थान का चुनाव किस आधार पर किया जाए और अदालत इस मामले में किस हद तक दखल दे सकती है।

अब यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने फिर पहुंच गया है। शीर्ष अदालत के अगले रुख से यह साफ होगा कि बनर्जी को विदेश में इलाज कराने के लिए राहत मिलती है या हाईकोर्ट का फैसला कायम रहता है।

बंगाल सरकार ने क्यों किया विरोध?

पश्चिम बंगाल सरकार ने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की मांग का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि उनके मामले में ऐसी कोई मेडिकल इमरजेंसी सामने नहीं आई है, जो विदेश जाकर इलाज कराने को जरूरी बनाती हो।

सरकार ने यह भी आशंका जताई है कि विदेश जाने की अनुमति से उनके खिलाफ चल रही जांच प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अदालत के सामने मेडिकल जरूरत और चल रही आपराधिक जांच—दोनों पहलू महत्वपूर्ण हो गए हैं।

फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है। एक तरफ बनर्जी अपने पहले से इलाज कर रहे अमेरिकी विशेषज्ञ के पास लौटना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ अदालत के सामने यह सवाल है कि विदेश में इलाज की जरूरत को किस मेडिकल आधार पर तय किया जाए। इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसका सीधा असर अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा और इलाज की योजना पर पड़ सकता है।

Case: Abhishek Banerjee v. State of West Bengal | SLP (Crl) 14489/2026