अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 3 FIR में गिरफ्तारी पर रोक, सरकार से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 3 FIR में गिरफ्तारी पर रोक, सरकार से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

समाजवादी पार्टी के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस से जुड़े तीन मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने तीनों FIR में उनकी गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा गया है। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि हाईकोर्ट ने अभी इन FIR को रद्द नहीं किया है। यानी मामला खत्म नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल गिरफ्तारी का तत्काल खतरा टल गया है।

यह मामला शस्त्र लाइसेंस की पुरानी पत्रावलियों के गायब होने और उनसे जुड़े कथित दुरुपयोग की जांच से सामने आया है। अफजाल अंसारी की ओर से तीनों FIR को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। अब कोर्ट के अंतरिम आदेश से इन मामलों में उनकी कानूनी स्थिति को लेकर अगली सुनवाई तक कुछ राहत मिली है।

तीन FIR पर कोर्ट का अहम आदेश, अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी नहीं

अफजाल अंसारी की याचिकाओं पर सुनवाई जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने की। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कोर्ट के सामने कई दलीलें रखीं। इनमें प्रमुख बात यह थी कि जिन शस्त्र लाइसेंस से संबंधित पत्रावलियों के गायब होने का मामला है, वे वर्ष 1983 से 1987 के बीच की बताई गई हैं।

वहीं, इन मामलों में FIR 22 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी। इसी तथ्य को लेकर अफजाल अंसारी की ओर से अदालत के सामने सवाल उठाए गए।

दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। सरकार को दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद अफजाल अंसारी की ओर से सरकार के जवाब पर एक सप्ताह के भीतर रिज्वाइंडर दाखिल किया जा सकेगा।

फिलहाल अदालत ने तीनों मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यानी अगली सुनवाई तक पुलिस इन FIR के आधार पर अफजाल अंसारी को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।

मामला क्या है? शस्त्र लाइसेंस की फाइलों से शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत शस्त्र लाइसेंसों की जांच से हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से मुख्तार अंसारी के गैंग को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की जांच की गई थी।

जांच के दौरान गाजीपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से कुछ शस्त्र लाइसेंसों की मूल पत्रावलियां और हथियारों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज गायब पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले में मुकदमे दर्ज किए।

इन FIR में अफजाल अंसारी के अलावा मुख्तार अंसारी की पत्नी और उस समय के शस्त्र लिपिकों समेत कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है।

यही तीन मामले अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने हैं। अफजाल अंसारी ने अपनी याचिकाओं में इन FIR को रद्द करने की मांग की है। लेकिन इस मांग पर अदालत ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, आगे क्या होगा?

अदालत का मौजूदा आदेश अंतरिम प्रकृति का है। इसका सीधा मतलब यह है कि अभी सिर्फ गिरफ्तारी से राहत मिली है। FIR की वैधता और उसे रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला बाद में होगा।

अदालत ने तीनों याचिकाओं को करीब तीन सप्ताह बाद फिर से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस दौरान राज्य सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद अफजाल अंसारी की ओर से उस जवाब पर रिज्वाइंडर दाखिल किया जाएगा।

यानी आने वाली सुनवाई इस मामले में काफी महत्वपूर्ण होगी। कोर्ट सरकार की दलीलों और रिकॉर्ड देखने के बाद आगे की दिशा तय करेगा।

सांसद के लिए राहत, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी बाकी

अफजाल अंसारी के लिए फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि तीनों FIR में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लग गई है। इससे उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की आशंका से राहत मिली है।

लेकिन इसे मामले में क्लीन चिट या FIR खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। हाईकोर्ट ने अभी सिर्फ अंतरिम सुरक्षा दी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

अब अगली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन FIR को लेकर अदालत के सामने क्या पक्ष रखती है और अफजाल अंसारी की ओर से उसके जवाब पर क्या दलील दी जाती है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने इस मामले में सांसद को अंतरिम राहत जरूर दी है, लेकिन अंतिम कानूनी स्थिति अगली सुनवाई और आगे के आदेशों पर निर्भर करेगी।