रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत मानचित्र के अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किए जाने के बाद अब यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने छात्रों और उनके अभिभावकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मुहिम में साथ देने का भरोसा दिलाया।
छात्रों और अभिभावकों के नाम लिखा खुला पत्र
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा किए गए अपने पत्र में कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संस्थान है।
उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर उनके साथ खड़ी है और लोकतांत्रिक तरीके से उनकी आवाज उठाएगी।
BJP सरकार पर लगाया बदले की राजनीति का आरोप
सपा प्रमुख ने अपने पत्र में भाजपा सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई में छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार की कार्रवाई से सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होगा, जो वहां पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय ऐसे कदम छात्रों में असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने हाल ही में जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है।
प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित निर्माण आवश्यक स्वीकृतियों के बिना किए गए हैं। हालांकि, इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रबंधन का पक्ष और आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण रहेगी।
अब राजनीतिक लड़ाई भी हुई तेज
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष इसे सरकार की कार्रवाई बता रहा है, जबकि प्रशासन अपने निर्णय को नियमानुसार बता रहा है।
आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल तेज रहने की संभावना है। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि आगे प्रशासन और अदालत की ओर से क्या फैसला आता है।



