अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के ऐलान पर चिराग पासवान का तंज, बोले- ‘उन्हें हार का डर, सेनापति मैदान छोड़कर महल में बैठेगा?’

अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के ऐलान पर चिराग पासवान का तंज, बोले- ‘उन्हें हार का डर, सेनापति मैदान छोड़कर महल में बैठेगा?’

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात कही, तो अब इस पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने निशाना साधा है। चिराग ने अखिलेश के फैसले को अटपटा बताते हुए कहा कि एक राजनीतिक दल के सेनापति को खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपने कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करना चाहिए, न कि महल में बैठकर मुकाबला देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव को चुनाव में हार का डर सता रहा है। चिराग के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। खास बात यह है कि चिराग ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया है।

अखिलेश के ऐलान पर चिराग का तंज, बोले- सेनापति मैदान में क्यों नहीं उतरेगा?

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव के चुनाव नहीं लड़ने वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि अखिलेश का यह फैसला उन्हें अटपटा लगा। चिराग के मुताबिक, किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रमुख की जिम्मेदारी होती है कि वह खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपने कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करे।

उन्होंने सेनापति और सैनिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि सेनापति का काम आगे बढ़कर लड़ाई का नेतृत्व करना होता है। वह महल में बैठकर अपने सैनिकों को लड़ते हुए नहीं देख सकता।

चिराग ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को विधानसभा चुनाव में हार का डर है। उन्हें अपनी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर चिंता हो सकती है। हालांकि, यह चिराग पासवान का राजनीतिक आरोप है, अखिलेश यादव ने अपने चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के पीछे हार का डर होने की बात नहीं कही है।

लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराने का भरोसा नहीं? महाराष्ट्र का भी दिया उदाहरण

चिराग पासवान ने अपने बयान में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों के अंतर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने संविधान और आरक्षण पर खतरे जैसे मुद्दे उठाकर जनता का समर्थन हासिल किया था।

चिराग ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोकसभा चुनाव में विपक्ष को जनता का साथ मिला, लेकिन विधानसभा चुनाव में एनडीए को भारी जीत हासिल हुई।

उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव को इसी तरह के राजनीतिक नतीजों की आशंका हो सकती है। संभव है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भरोसा न हो और इसी वजह से उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की बात कही हो।

हालांकि, यूपी विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितना समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। फिलहाल अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता अपने बयानों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं।

गठबंधन नहीं हुआ तो सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी LJP (रामविलास)

चिराग पासवान ने बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर भी बड़ा बयान दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, चुनाव से पहले किसी दूसरे राजनीतिक दल के साथ गठबंधन को लेकर अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

चिराग ने कहा कि अगर सहयोगी दलों के साथ गठबंधन नहीं हो पाया, तो उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

इस बयान के राजनीतिक मायने भी अहम हैं। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है और यहां चुनावी मुकाबले में छोटे दलों की भूमिका भी गठबंधन की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

अब देखना होगा कि चुनाव से पहले LJP (रामविलास) किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनती है या अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है।

अखिलेश यादव ने क्यों कहा- विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा?

दरअसल, अखिलेश यादव ने मंगलवार को वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान साफ कहा था कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह विधानसभा चुनाव में किसी सीट से उम्मीदवार बनेंगे, तो उन्होंने अपने अंदाज में जवाब दिया कि वह पहले भी विधानसभा चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी वही करेंगे, जो उनके लिए शुभ होगा।

अखिलेश ने 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय वह लोकसभा सांसद रहते हुए ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इस बार भी उनकी योजना लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की है।

वाराणसी में समाजवादी पार्टी के चुनाव लड़ने वाली सीट को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने पत्रकारों से ही सीट का नाम बताने को कहा।

फिलहाल यूपी चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव और चिराग पासवान के बीच बयानबाजी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने को लेकर अपना भरोसा जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ चिराग पासवान उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी रणनीति कैसे तैयार करती है और LJP (रामविलास) प्रदेश में किस राजनीतिक समीकरण के साथ मैदान में उतरती है।