आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अब भारत भी अपनी मजबूत पहचान बनाने की तैयारी में है। अब तक AI टेक्नोलॉजी के बाजार में अमेरिका और चीन की कंपनियों का दबदबा रहा है, लेकिन भारत ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार के IT मंत्रालय और IndiaAI Mission के सहयोग से देश में तैयार किए गए तीन स्वदेशी AI मॉडल EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B लॉन्च किए गए हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें से दो मॉडल बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी स्मार्टफोन और लैपटॉप पर काम कर सकते हैं। यानी दस्तावेजों से जानकारी निकालने, जरूरी सवालों के जवाब पाने और रोजमर्रा के कई डिजिटल कामों के लिए हर बार इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। इतना ही नहीं, डिवाइस पर ही डेटा प्रोसेस होने से निजी जानकारी की सुरक्षा बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये मॉडल देश में AI के इस्तेमाल को ज्यादा आसान और सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
EKA-1: मुश्किल गणित से कोडिंग तक संभालेगा AI का काम
तीनों स्वदेशी AI मॉडल में EKA-1 को सबसे बड़ा और शक्तिशाली मॉडल बताया गया है। इसे बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी Soket Labs ने तैयार किया है। इसका फोकस केवल सामान्य सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जटिल गणितीय समस्याओं, सॉफ्टवेयर कोडिंग और लॉजिकल रीजनिंग जैसे कामों के लिए विकसित किया गया है।
इस मॉडल में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और इसे करीब 7.5 ट्रिलियन टोकन के डेटा पर ट्रेन किया गया है। आसान भाषा में समझें तो पैरामीटर AI मॉडल के अंदर मौजूद वे संख्यात्मक मान होते हैं, जिनकी मदद से वह जानकारी को समझता है और जवाब तैयार करता है।
EKA-1 अंग्रेजी के साथ भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग भाषाओं में काम करने वाले यूजर्स भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके संभावित इस्तेमाल बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में हो सकते हैं। खासतौर पर ऐसे कामों में, जहां डेटा का विश्लेषण और जटिल समस्याओं का समाधान जरूरी होता है।
Dhir 2B और Dhir 5B की सबसे बड़ी ताकत, बिना इंटरनेट करेंगे काम
EKA-1 जहां बड़े और जटिल कामों के लिए तैयार किया गया है, वहीं Dhir 2B और Dhir 5B का फोकस रोजमर्रा के कामों को आसान बनाना है। इन दोनों मॉडल को ZenteiQ AiTech Innovations ने विकसित किया है।
ये अपेक्षाकृत छोटे AI मॉडल हैं और ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं। दोनों अंग्रेजी के अलावा 10 भारतीय भाषाओं को समझ सकते हैं।
इनकी सबसे खास बात ऑफलाइन काम करने की क्षमता है। यूजर इन्हें अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप में डाउनलोड करके बिना इंटरनेट कनेक्शन के इस्तेमाल कर सकते हैं।
इनकी मदद से डिजिटल दस्तावेजों में जरूरी जानकारी खोजना, लंबे डॉक्यूमेंट से महत्वपूर्ण बातें निकालना और सामान्य कामों को तेजी से पूरा करना आसान हो सकता है।
मसलन, किसी व्यक्ति को किसी बड़े दस्तावेज में से जरूरी जानकारी निकालनी है, तो वह इसके लिए इन AI मॉडल की मदद ले सकता है। हर बार डेटा किसी ऑनलाइन सर्वर पर भेजने की जरूरत नहीं होगी।
डेटा लीक का खतरा होगा कम, प्राइवेसी के लिहाज से क्यों अहम हैं ये मॉडल?
आज ज्यादातर लोकप्रिय AI टूल्स इंटरनेट के जरिए काम करते हैं। यूजर सवाल पूछता है या कोई फाइल अपलोड करता है, तो उसकी जानकारी प्रोसेसिंग के लिए ऑनलाइन सर्वर तक पहुंचती है।
यहीं से डेटा प्राइवेसी को लेकर चिंता शुरू होती है। खासकर तब, जब किसी फाइल में बैंकिंग डिटेल, सरकारी रिकॉर्ड, कंपनी की गोपनीय जानकारी या व्यक्तिगत दस्तावेज मौजूद हों।
Dhir 2B और Dhir 5B जैसे ऑफलाइन मॉडल इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। चूंकि ये सीधे यूजर के डिवाइस पर काम कर सकते हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेस होने वाले डेटा को बार-बार बाहरी सर्वर पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डेटा सुरक्षा की पूरी गारंटी मिल गई है। डिवाइस की सुरक्षा, सॉफ्टवेयर और इस्तेमाल के तरीके भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन मॉडलों का इस्तेमाल शिक्षा, सरकारी विभागों और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकता है। जहां इंटरनेट की उपलब्धता सीमित हो या डेटा की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी हो, वहां ऑफलाइन AI तकनीक एक विकल्प बन सकती है।
IndiaAI Mission ने कैसे तैयार किए स्वदेशी AI मॉडल?
AI मॉडल तैयार करना आसान काम नहीं है। इसके लिए बड़ी मात्रा में डेटा, महंगे कंप्यूटिंग संसाधनों और लंबे रिसर्च की जरूरत होती है। खासकर बड़े AI मॉडल को ट्रेन करने में काफी पैसा खर्च होता है।
इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार के IndiaAI Mission ने इन स्टार्टअप्स को सहयोग दिया। इसके तहत कम लागत पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराए गए और रिसर्च के लिए आर्थिक मदद भी दी गई।
सरकार के इस सहयोग से भारतीय स्टार्टअप्स को अपने AI मॉडल विकसित करने और उन्हें ट्रेन करने में मदद मिली।
भारत के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश की AI टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तकनीक विकसित करने का रास्ता भी मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B की लॉन्चिंग भारत के AI सेक्टर के लिए अहम कदम है। खासकर ऑफलाइन AI की सुविधा आम यूजर्स, छोटे कारोबारियों और सरकारी संस्थानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। हालांकि, इन मॉडलों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इनका प्रदर्शन कितना बेहतर रहता है और आम लोग इन्हें कितनी आसानी से अपना पाते हैं।

