BRICS Summit 2026 से पहले PM मोदी की कूटनीतिक दौड़, मलेशिया-इथियोपिया-UAE नेताओं से हुई अहम बैठकें

BRICS Summit 2026 से पहले PM मोदी की कूटनीतिक दौड़, मलेशिया-इथियोपिया-UAE नेताओं से हुई अहम बैठकें

दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार को उन्होंने मलेशिया, इथियोपिया और UAE से जुड़े शीर्ष नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में सिर्फ BRICS की चर्चा नहीं हुई, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी बात हुई। ऐसे समय में जब दिल्ली में दुनिया के कई देशों के नेता जुटे हैं, भारत इन बैठकों के जरिए अपने द्विपक्षीय रिश्तों को भी मजबूत करने की कोशिश करता दिख रहा है।

मलेशिया के साथ व्यापार से सेमीकंडक्टर तक चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बैठक की। मलेशिया भारत के निमंत्रण पर BRICS में पार्टनर देश के रूप में शामिल हुआ है। पीएम मोदी ने अनवर इब्राहिम का भारत में स्वागत किया और सम्मेलन में मलेशिया की भागीदारी की सराहना की।

दोनों नेताओं ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच हुए काम की समीक्षा की। चर्चा का दायरा काफी व्यापक रहा।

इसमें व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, ऊर्जा और फिनटेक जैसे क्षेत्र शामिल रहे। शिक्षा, पर्यटन और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में एक अहम बात यह रही कि मलेशिया ने कोटा किनाबालु, सबाह में भारत का कॉन्सुलेट जनरल खोलने पर सहमति जताई। इससे दोनों देशों के बीच लोगों और कारोबारी संपर्क को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

ASEAN के साथ रिश्तों में मलेशिया की भूमिका पर भी जोर

पीएम मोदी ने ASEAN-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया के निरंतर सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर साझा हित से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

दोनों देशों ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

व्यापार और निवेश के नजरिए से देखें तो यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पारंपरिक कारोबार के साथ टेक्नोलॉजी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं। यानी दोनों देशों के रिश्तों का फोकस अब केवल सामान्य व्यापार तक सीमित नहीं है।

इथियोपिया के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग पर बनी बात

प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबिय अहमद अली के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और इथियोपिया के संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

बैठक में आर्थिक सहयोग, रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। यह मुलाकात दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अदीस अबाबा यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने वाली रही।

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

पीएम मोदी ने BRICS सम्मेलन में इथियोपिया की भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इथियोपिया की मौजूदगी से ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज को मजबूती मिलती है।

UAE के क्राउन प्रिंस से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर फोकस

दिन की अहम बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मुलाकात भी शामिल रही।

यह बैठक BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। दोनों पक्षों ने भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बातचीत की।

UAE के साथ भारत के रिश्तों का महत्व कारोबार और निवेश के लिहाज से भी देखा जाता है। ऐसे में BRICS जैसे बड़े बहुपक्षीय मंच के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात का अपना कूटनीतिक और आर्थिक महत्व है।

दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की लगातार हो रही द्विपक्षीय बैठकों से भारत का एक व्यापक कूटनीतिक एजेंडा भी सामने आता है। एक तरफ भारत BRICS के मंच पर वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा कर रहा है, तो दूसरी तरफ सम्मेलन में पहुंचे देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मलेशिया के साथ सेमीकंडक्टर और डिजिटल अर्थव्यवस्था, इथियोपिया के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग तथा UAE के साथ रणनीतिक साझेदारी पर हुई बातचीत इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। आम लोगों के लिए इन बैठकों का असर आगे चलकर व्यापार, निवेश, तकनीक, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।