देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न्यायिक व्यवस्था के प्रशासनिक कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक याचिका की फाइल कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से गायब होने की जानकारी मिलने पर प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल लिस्टिंग का मामला नहीं है, बल्कि इसकी जड़ तक जाकर कारणों का पता लगाया जाएगा।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब एक अधिवक्ता ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने अपनी चिंता रखी। वकील ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से इस महीने की शुरुआत में एक याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन अब तक उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। जब उन्होंने इसकी जानकारी लेने की कोशिश की तो पता चला कि संबंधित फाइल रजिस्ट्री में उपलब्ध नहीं है।
वकील की शिकायत से खुला मामला
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि उन्होंने इस संबंध में रजिस्ट्रार को लिखित रूप से भी अवगत कराया था। इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ सका। उनका कहना था कि याचिका की फाइल रजिस्ट्री में कहीं गुम हो गई है, जिसके चलते उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा।
अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को जल्द सूचीबद्ध किया जाए। लेकिन इस पर प्रधान न्यायाधीश की प्रतिक्रिया और भी सख्त रही।
‘फाइल गुम होना बेहद गंभीर मामला’
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था की रजिस्ट्री में फाइलें गायब हो रही हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि केवल याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश देना पर्याप्त नहीं होगा।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें ही सुरक्षित नहीं हैं, तो इसकी गहन जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखेंगे और यह पता लगाएंगे कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी।
प्रधान न्यायाधीश ने अधिवक्ता से कहा कि वह अपने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) के माध्यम से उसी दिन औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं, ताकि मामले की जांच शुरू की जा सके।
रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला अवसर नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के कामकाज को लेकर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताई हो। इससे पहले मई महीने में भी प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रजिस्ट्री के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की थी।
एक मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि रजिस्ट्री के कुछ अधिकारी ऐसे व्यवहार कर रहे हैं मानो वे “सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया” हों। अदालत ने तब रजिस्ट्री की कार्यशैली को बेहद खराब बताते हुए सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया था।
न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर अहम सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली हर याचिका और दस्तावेज का रिकॉर्ड बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में किसी फाइल के कथित रूप से गायब होने की खबर न्यायिक प्रशासन की पारदर्शिता और दक्षता को लेकर गंभीर चर्चा का विषय बन सकती है।
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि फाइल वास्तव में खो गई है, गलत स्थान पर रखी गई है या किसी प्रशासनिक त्रुटि का मामला है। लेकिन CJI के हस्तक्षेप के बाद अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच होने की संभावना है।
आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक थी या इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही जिम्मेदार है।



