नई दिल्ली: शनिवार यानि 1 दिसंबर को पूरी दुनिया वर्ल्ड एड्स डे मना रही है. ये 30वां वर्ल्ड एड्स डे है. इसे मनाने के पीछ की वजह ये है कि इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताना और उनको इसको लेकर जागरूक करना. साथ ही लोगों के बीच जो इस बीमारी को लेकर गलतफहमी है उनको दूर करना भी इसका उद्देश्य है,
यहां मिला नया इंफेक्शन
अभी भी एड्स से मरने वालों की संख्या इस्टर्न यूरोप और सेंट्रल एशिया, मीडिल इस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में ज्यादा है. UNAIDS अगस्त 2018 की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्टर्न यूरोप और सेंट्रल एशिया के देशों में नया एचआईवी इंफेक्शन पाए गए हैं. वहीं ये आंकड़ा आपको हैरान कर देगा कि 60 हजार में से 2 हजार लोगों को था. वहीं 2018 में यह आंकड़ा दोगुना हो गया है.
इस देश में सबसे ज्यादा मरीज
रूस एक ऐसा देश है जहां एचआईवी मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हैं. वहीं इस बात का कुछ ऐसा भी कहा जा सकता है कि इस क्षेत्र के 70 प्रतिशत लोग इस बीमारी के शिकार हैं. रूस में एचाआईवी का पहला केस मॉस्को में पाया गया था और 2017 में 39 प्रतिशत ऐसे लोगों का पता चला जिनकी शारीरिक जांच के बाद पता चला कि एड्स के शिकार हैं. वहीं इसमें सबसे खास बात ये थी कि इनमें से ज्यादातर लोग वो थे जो ड्रग्स लेते थे.