मथुरा में आज से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान का नया चरण? शिलापूजन के साथ कारसेवा का शंखनाद, प्रशासन अलर्ट

मथुरा में आज से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान का नया चरण? शिलापूजन के साथ कारसेवा का शंखनाद, प्रशासन अलर्ट

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद को लेकर रविवार, 9 अगस्त को हलचल बढ़ने वाली है। अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के लिए कारसेवा का ऐलान किया गया है। राधाकुंड क्षेत्र स्थित चित्रकूट पीठ में हवन-यज्ञ और शिलापूजन के साथ इसकी शुरुआत प्रस्तावित है। राजस्थान के भरतपुर से गुलाबी पत्थर मथुरा पहुंच चुके हैं और इन्हीं पर नक्काशी का काम शुरू किए जाने की तैयारी है। दूसरी तरफ संभावित भीड़ और कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

शिलापूजन से शुरू होगा अभियान, साधु-संतों की जुटेगी भीड़

प्रस्तावित कार्यक्रम चित्रकूट पीठ में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, यहां हवन-यज्ञ और शिलापूजन के बाद कारसेवा की शुरुआत होगी। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के साधु-संतों के अलावा अलग-अलग हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के पहुंचने की संभावना है।

आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। बाहर से आने वाले साधु-संतों और कार्यकर्ताओं का मथुरा पहुंचना शनिवार शाम से ही शुरू हो गया था। उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी किए जाने की बात कही गई है।

इस पूरे अभियान की घोषणा चित्रकूट पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को की थी। उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए 9 अगस्त से कारसेवा शुरू करने का ऐलान किया था।

भरतपुर से आए गुलाबी पत्थरों पर 20 कारीगर करेंगे काम

कारसेवा के इस चरण में सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण से जुड़ी तैयारियों का प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। राजस्थान के भरतपुर से गुलाबी पत्थरों की खेप मथुरा पहुंचाई गई है। इन पत्थरों पर नक्काशी के लिए ओडिशा से 20 कारीगर बुलाए गए हैं। कार्यक्रम में शिलापूजन और हवन-यज्ञ के बाद इन कारीगरों द्वारा नक्काशी का काम शुरू करने की तैयारी है।

आयोजकों की नजर में यह प्रक्रिया आंदोलन के अगले चरण का हिस्सा है। हालांकि, जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर से जुड़ा मूल विवाद अभी अदालतों में विचाराधीन है। ऐसे में कारसेवा और मंदिर निर्माण की तैयारियों से जुड़े कार्यक्रम का राजनीतिक और सामाजिक असर भी देखा जा रहा है।

प्रशासन भी सतर्क, 12 साधु-संतों को नोटिस

संभावित भीड़ और कार्यक्रम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रशासन ने साध्वी रत्नप्रभा, कथावाचक देवकीनंदन महाराज समेत 12 साधु-संतों को रेड कार्ड नोटिस जारी किया है।

इन नोटिसों के जरिए क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। प्रशासन की चिंता मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था को लेकर है, क्योंकि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

आयोजकों का कहना है कि हवन, शिलापूजन और दूसरे कार्यक्रम चित्रकूट पीठ के आश्रम परिसर के भीतर ही किए जाएंगे। इससे कार्यक्रम के संचालन को लेकर उनकी ओर से एक स्पष्ट व्यवस्था बताई गई है।

अदालत में मामला लंबित, फिर क्यों बढ़ी हलचल?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर से संबंधित विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी पृष्ठभूमि में 9 अगस्त को प्रस्तावित कारसेवा ने इस मुद्दे को फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है।

आम लोगों के लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू कानून-व्यवस्था है। धार्मिक आयोजन के साथ बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना रहती है, ऐसे में प्रशासन की भूमिका शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने की होगी।

फिलहाल आज के कार्यक्रम में शिलापूजन, हवन-यज्ञ और गुलाबी पत्थरों पर नक्काशी की शुरुआत प्रस्तावित है। आयोजकों के लिए यह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान को आगे बढ़ाने का अगला कदम है, जबकि प्रशासन के लिए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना प्राथमिक चुनौती है। अदालतों में विवाद से जुड़े मामलों की प्रक्रिया जारी रहने के बीच मथुरा में आज की गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।