दाल, आटा और दूसरे रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए नैफेड की नई योजना अहम हो सकती है। किसानों के सहकारी संगठन ने खाद्य प्रसंस्करण और खुदरा कारोबार को बढ़ाने के लिए दिल्ली और राजस्थान में तीन नए प्लांट लगाने की तैयारी की है। इनमें दिल्ली के नजफगढ़ में दाल प्लांट, राजस्थान के भरतपुर में आटा प्लांट और भिवाड़ी में शहद व अन्य खाद्य उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं से नैफेड अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहता है। साथ ही, संगठन का लक्ष्य बाहरी प्रोसेसिंग पर होने वाला खर्च कम करना और बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच मजबूत करना है। नैफेड को उम्मीद है कि खुदरा कारोबार में भी इस विस्तार का फायदा मिलेगा।
दिल्ली के नजफगढ़ में 14 करोड़ रुपये से बनेगा दाल प्लांट
नैफेड दिल्ली के नजफगढ़ स्थित उजवा क्षेत्र में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक दाल प्लांट लगाने जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नैफेड की बोर्ड बैठक में इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए टेंडर भी जारी किए गए हैं।
प्लांट के निर्माण और उसे स्थापित करने में लगभग एक साल लगने का अनुमान है। योजना के अनुसार, इसे अगले साल अक्टूबर तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस यूनिट के शुरू होने से नैफेड को दालों की प्रोसेसिंग के लिए बाहरी इकाइयों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे उत्पादन की लागत पर नियंत्रण रखने और बाजार की मांग के हिसाब से दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश होगी।
उपभोक्ताओं के लिए इसका फायदा उत्पादों की गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, दालों की कीमतों में कितनी कमी आएगी या खुदरा दरों पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
राजस्थान में भरतपुर और भिवाड़ी को मिलेगा नया औद्योगिक निवेश
नैफेड राजस्थान में भी अपने विनिर्माण कारोबार का विस्तार करने की तैयारी में है। इसके तहत भरतपुर में संगठन का पहला इन-हाउस आटा प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी RFP की प्रक्रिया चल रही है।
इन-हाउस प्लांट का मतलब है कि संगठन अपनी जरूरत के मुताबिक उत्पादन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था खुद विकसित करेगा। इससे आटे की गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया और आपूर्ति पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, भिवाड़ी में करीब 7.5 एकड़ जमीन पर शहद प्रोसेसिंग यूनिट के साथ फूड प्रोसेसिंग और अन्य खाद्य इकाइयां स्थापित करने की योजना है। इन इकाइयों के जरिए नैफेड अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाना चाहता है।
दाल, आटा और शहद जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने से संगठन को बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। किसानों से जुड़े सहकारी ढांचे के तहत इस तरह की परियोजनाएं कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
खुदरा कारोबार 32 करोड़ से बढ़कर 90 करोड़ रुपये पहुंचने का लक्ष्य
नैफेड सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही काम नहीं कर रहा, बल्कि अपने खुदरा नेटवर्क को भी मजबूत कर रहा है। संगठन लखनऊ, जयपुर, इंदौर, गुवाहाटी और कोलकाता जैसे शहरों में नए रिटेल स्टोर खोलने की तैयारी कर रहा है।
इसके साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए घर तक सामान पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मौजूदा स्टोरों में डार्क स्टोर बनाए जा रहे हैं। डार्क स्टोर ऐसे केंद्र होते हैं, जहां से ऑनलाइन ऑर्डर की पैकिंग और डिलीवरी की तैयारी की जाती है। यहां आम ग्राहकों के लिए सामान्य खुदरा खरीदारी की सुविधा जरूरी नहीं होती।
नैफेड के खुदरा कारोबार का आकार वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 32 करोड़ रुपये रहा था। चालू वित्त वर्ष में इसके लगभग 90 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो संगठन के खुदरा कारोबार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
इस विस्तार के पीछे एक अहम रणनीति यह है कि नैफेड उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाली व्यवस्था को मजबूत करे। नए प्लांट और रिटेल स्टोर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आम ग्राहकों और किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
नैफेड की नई परियोजनाओं का असर केवल संगठन की कमाई तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर प्रोसेसिंग और वितरण व्यवस्था से खाद्य उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, खुदरा नेटवर्क के विस्तार से अधिक शहरों में ग्राहकों तक नैफेड के उत्पाद पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
किसानों के लिए भी सहकारी संस्थाओं की मजबूत बाजार व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए बेहतर ढांचा विकसित करना इस क्षेत्र की जरूरतों में शामिल है। हालांकि, इन परियोजनाओं से किसानों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ, रोजगार के अवसरों और उत्पादों की कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर अभी विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
फिलहाल, दिल्ली और राजस्थान में नए प्लांट लगाने तथा खुदरा कारोबार को बढ़ाने की योजना नैफेड की कारोबारी रणनीति में बदलाव का संकेत देती है। संगठन उत्पादन क्षमता बढ़ाकर, बाहरी खर्च कम करके और ऑनलाइन बिक्री को मजबूत करके अपनी कमाई में इजाफा करना चाहता है। आने वाले समय में इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परियोजनाएं तय समय पर कितनी प्रभावी ढंग से शुरू होती हैं और बाजार में उनके उत्पादों की मांग कैसी रहती है।