उद्यमिता केवल बिजनेस शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बन सकती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (NIU) के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट ने 19 अगस्त 2026 को “Entrepreneurship: Women Founders, Social Entrepreneurs and Inclusive Startups” विषय पर एक विशेष एक्सपर्ट टॉक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को ऐसे स्टार्टअप मॉडल से परिचित कराना था, जो केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि समाज और समावेशी विकास पर भी समान रूप से ध्यान देते हैं।
यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के Institution’s Innovation Council (IIC) के तत्वावधान में SBM Seminar Hall में आयोजित किया गया, जहां छात्रों ने महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियों से लेकर सरकारी स्टार्टअप योजनाओं तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं को करीब से समझा।
महिला फाउंडर्स की सफलता की कहानियों से मिली नई प्रेरणा
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. ऋचा श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, NIU थीं। उन्होंने “Empowering Ideas, Building Impact, Creating an Inclusive Future” विषय पर अपने संबोधन में बताया कि आज भारत में उद्यमिता का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसमें महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

उन्होंने देश की कई सफल महिला उद्यमियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उन्होंने अपनी पहचान बनाई। इनमें किरण मजूमदार-शॉ, फाल्गुनी नायर, विनीता सिंह, गजल अलाघ, राधिका घई और अदिति गुप्ता जैसी उद्यमियों के सफर को विस्तार से साझा किया गया। इन उदाहरणों के जरिए छात्रों को यह समझाया गया कि सही विचार, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प के साथ सामाजिक प्रभाव पैदा करने वाले स्टार्टअप भी सफल हो सकते हैं।
People, Planet और Profit का संतुलन क्यों है जरूरी?
सत्र के दौरान डॉ. श्रीवास्तव ने उद्यमिता के Triple Bottom Line यानी People, Planet and Profit की अवधारणा को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्टार्टअप केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों के जीवन में सुधार और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाते हैं।
उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि भारत में स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए कई सरकारी योजनाएं उपलब्ध हैं। इनमें Startup India, Women Entrepreneurship Platform (WEP), Stand-Up India, PMEGP और मुद्रा योजना जैसे कार्यक्रम नए उद्यमियों को वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Think–Pair–Share गतिविधि बनी कार्यक्रम की सबसे खास कड़ी
कार्यक्रम का अंतिम चरण सबसे अधिक सहभागिता वाला रहा। इसमें Think–Pair–Share गतिविधि आयोजित की गई, जहां छात्रों ने पहले व्यक्तिगत रूप से रोजमर्रा की समस्याओं पर विचार किया, फिर जोड़ी बनाकर उनके समाधान पर चर्चा की और अंत में ऐसे स्टार्टअप आइडिया साझा किए, जिन्हें महिला नेतृत्व या सामाजिक उद्यमिता के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।
इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने स्टार्टअप शुरू करने, सामाजिक प्रभाव वाले बिजनेस मॉडल और महिला नेतृत्व से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका डॉ. श्रीवास्तव ने विस्तार से जवाब दिया।
‘Inclusion’ शुरुआत से होना चाहिए, बाद में नहीं
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि समावेशिता (Inclusion) कोई बाद में जोड़ा जाने वाला तत्व नहीं, बल्कि शुरुआत से लिया गया डिज़ाइन निर्णय है। वक्ता ने छात्रों से कहा कि यदि किसी स्टार्टअप की नींव में ही समान अवसर, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यापक भागीदारी की सोच शामिल हो, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक स्थायी और व्यापक हो सकता है।
यह सत्र केवल एक व्याख्यान नहीं रहा, बल्कि छात्रों के लिए उद्यमिता को सामाजिक बदलाव के नजरिए से समझने का अवसर भी बना। खासकर बिजनेस मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम इस बात का व्यावहारिक उदाहरण बनकर सामने आया कि भविष्य के सफल स्टार्टअप केवल नए उत्पाद नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के प्रभावी समाधान भी तैयार कर सकते हैं।




