उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर चल रही अटकलों के बीच कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है। राजभर ने कहा है कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले समय में पार्टी में बगावत देखने को मिल सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि इस संभावित बगावत की अगुवाई “बागी बलिया” की धरती से होगी।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक लंबी पोस्ट में राजभर ने सपा नेतृत्व, संगठन और हालिया राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा की अनुपस्थिति को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बढ़ना अंदरूनी असहमति का संकेत हो सकता है।
पीडीए कार्यक्रम से शुरू हुआ नया राजनीतिक विवाद
राजभर ने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्यक्रम का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि मुरादाबाद की सांसद कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचीं। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि बाद में यह तर्क दिया जा सकता है कि सूचना नहीं मिली या कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
हालांकि, सपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजभर के बयान ने एक बार फिर सपा के भीतर संभावित असंतोष को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
रामगोपाल यादव पर लगाए गंभीर आरोप
अपने बयान में राजभर ने सपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्गों के नेताओं के प्रति उनका रवैया सम्मानजनक नहीं रहा है।
राजभर ने दावा किया कि उनके और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे बहुजन समाज ने देखा और सुना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की सोच अब भी जातिगत श्रेष्ठता से प्रभावित है।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक रामगोपाल यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
‘असली चाचा’ बन सकते हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष?
राजभर ने अपने बयान में सपा के भविष्य के नेतृत्व को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर पार्टी में टूट होती है तो नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ सकती है।
उन्होंने कहा कि “असली चाचा” ही पार्टी को दोबारा खड़ा कर सकते हैं। राजनीतिक हलकों में इसे शिवपाल सिंह यादव की ओर इशारा माना जा रहा है, हालांकि राजभर ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया।
सपा ने पहले भी खारिज किए हैं ऐसे दावे
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ओम प्रकाश राजभर लगातार सपा में टूट और असंतोष के दावे कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने पार्टी के कई नेताओं को लेकर बयान दिए थे। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इन दावों को लगातार खारिज करती रही है।
सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विपक्षी दल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। फिलहाल, राजभर के ताजा बयान ने यूपी की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन सपा में किसी संभावित टूट को लेकर अभी तक कोई ठोस संकेत सामने नहीं आए हैं।



