PM मोदी की अपील पर सियासी लहर: कई राज्यों में मंत्री साइकिल-मेट्रो पर, काफिले आधे हुए

PM मोदी की अपील पर सियासी लहर: कई राज्यों में मंत्री साइकिल-मेट्रो पर, काफिले आधे हुए

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत की अपील तेजी से असर दिखा रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार समेत कई राज्यों में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने व्यावहारिक कदम उठाए हैं। आम लोगों के लिए यह पहल महंगाई के बोझ को कम करने और राष्ट्रहित में योगदान का मौका बन सकती है।

सरकारों का मानना है कि छोटे-छोटे बदलाव से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। कई नेता अब खुद सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल चलकर ऑफिस पहुंच रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बड़े बदलाव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने का फैसला किया है। बड़े संस्थानों को हफ्ते में दो दिन WFH की सलाह दी गई है। राज्य सचिवालय और निदेशालय की 50 प्रतिशत आंतरिक बैठकें अब वर्चुअल होंगी।

मुख्यमंत्री ने अपने और मंत्रियों के वाहन काफिले में तत्काल 50 प्रतिशत की कमी करने के निर्देश दिए हैं। जनप्रतिनिधियों से हफ्ते में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील की गई है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘मेरा भारत मेरा योगदान’ अभियान शुरू किया है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम होगा। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे हफ्ते में एक दिन अपनी निजी गाड़ी घर पर रखें। इस अभियान को 90 दिनों तक स्कूलों, कॉलेजों और आरडब्ल्यूए में चलाया जाएगा।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के कदम

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या न्यूनतम कर दी है। भ्रमण के दौरान अब कोई वाहन रैली नहीं निकाली जाएगी। सभी मंत्रियों को भी यात्राओं में कम गाड़ियों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अनावश्यक यात्राओं पर रोक लगाने और काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने के निर्देश दिए हैं। महाराष्ट्र में मंत्रियों को सरकारी काम से हवाई यात्रा करने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अनुमति लेनी होगी। खुद फडणवीस बाइक से ऑफिस पहुंचे थे।

गुजरात, बिहार और अन्य राज्यों की पहल

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने घोषणा की कि वे राज्य के अंदर हवाई यात्रा की बजाय ट्रेन और एसटी बसों का इस्तेमाल करेंगे। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने अमेरिका का अपना दौरा रद्द कर दिया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद पैदल घर से ऑफिस पहुंचे। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने वाहनों की संख्या आधी कर दी है।

ये फैसले दिखाते हैं कि प्रधानमंत्री की अपील को राज्य स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। कई जगहों पर कार पूलिंग, ईवी और साइकिलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आम आदमी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इन कदमों से सरकारी खर्च में बचत होगी, जो अंततः जनता को राहत दे सकती है। अगर यह अभियान सफल रहा तो पेट्रोल-डीजल की खपत कम होने से कीमतों पर दबाव घट सकता है। आम नागरिकों को भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

यह पहल सिर्फ अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में अन्य राज्य भी इसी तर्ज पर कदम उठा सकते हैं।