PM CARES Fund पर नई बहस: अभिजीत दीपके बोले- ₹8,452 करोड़ से बन सकते हैं 1,000 से ज्यादा हाईटेक स्कूल

PM CARES Fund पर नई बहस: अभिजीत दीपके बोले- ₹8,452 करोड़ से बन सकते हैं 1,000 से ज्यादा हाईटेक स्कूल

पीएम केयर्स फंड को लेकर एक बार फिर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने मांग की है कि फंड में मौजूद हजारों करोड़ रुपये का इस्तेमाल देशभर के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने और नए हाईटेक स्कूल बनाने में किया जाए। उन्होंने दावा किया कि अगर फंड में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि शिक्षा पर खर्च की जाए, तो 1,000 से अधिक आधुनिक स्कूल बनाए जा सकते हैं।

दीपके ने यह मांग ऐसे समय उठाई है, जब उनकी पार्टी गांवों में “स्कूल ठीक करो” अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत वे अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने ला रहे हैं।

PM CARES Fund को लेकर क्या कहा अभिजीत दीपके ने?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में अभिजीत दीपके ने कहा कि हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में ₹8,452 करोड़ की राशि उपलब्ध थी। उनके अनुसार, एक ओर इतनी बड़ी रकम फंड में मौजूद है, जबकि दूसरी ओर देश के कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

दीपके ने कहा कि यदि एक आधुनिक स्कूल के निर्माण की लागत करीब ₹8 करोड़ मानी जाए, तो इसी राशि से एक हजार से अधिक नए हाईटेक स्कूल तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस फंड का उपयोग बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए।

ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों से तेज हुई चर्चा

दीपके ने अपनी दलील में पीएम केयर्स फंड की ऑडिट रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक फंड में कुल राशि ₹8,452 करोड़ थी, जबकि एक साल पहले यह ₹7,173 करोड़ थी।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान फंड से कुल 87.85 लाख रुपये का भुगतान हुआ, जबकि इससे पहले वाले वित्त वर्ष में यह राशि 15.6 करोड़ रुपये थी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कमी की बात कही जा रही है, तो उपलब्ध धनराशि के उपयोग पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए।

गांवों के स्कूलों का दौरा, कई कमियां गिनाईं

अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हालत में हैं।

उन्होंने विशेष रूप से हिंगोली जिले के एक सरकारी स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कक्षाओं और शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए थे। उनके अनुसार, शौचालयों में नल तक नहीं थे और पूरा परिसर काफी जर्जर दिखाई दिया।

दीपके ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से इन कमियों के बारे में पूछा, तो उन्हें जवाब मिला कि पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पीएम केयर्स फंड की राशि को शिक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल करने की मांग दोहराई।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के केंद्र में शिक्षा का मुद्दा

कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों गांवों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर लगातार अभियान चला रही है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल अभिजीत दीपके का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। उनके स्कूल दौरों के वीडियो भी व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। हालांकि, इस मांग पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।