पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को पूरी तरह बदल दिया है। 15 सालों तक सत्ता पर काबिज रहने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हाथ से सत्ता फिसल चुकी है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। लेकिन इस चुनावी जीत के साथ ही विवादों का एक नया पिटारा खुल गया है। टीएमसी और कांग्रेस ने मिलकर ‘वोट चोरी’ का राग छेड़ दिया है। इसी कड़ी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी की चुनावी साख पर प्रहार किया है।
राहुल गांधी का ‘घुसपैठिया’ तंज: सांसदों की साख पर सवाल?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बेहद तल्ख लहजे में बीजेपी पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के जो 240 सांसद चुनकर आए हैं, उनमें से मोटे तौर पर हर छठा सांसद जनता के असली वोटों से नहीं, बल्कि ‘वोट चोरी’ के जरिए सदन तक पहुंचा है। उन्होंने बीजेपी की ही शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए पूछा कि क्या इन सांसदों को ‘घुसपैठिया’ कहना चाहिए? इतना ही नहीं, उन्होंने हरियाणा की मौजूदा सरकार को भी इसी श्रेणी में रखते हुए उसे पूरी तरह ‘घुसपैठिया’ करार दिया। उनके इस बयान ने चुनावी निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, जो भविष्य की राजनीति के लिए गंभीर संकेत हैं।
‘रिमोट कंट्रोल’ संस्थाएं और 140 सीटों का गणित
कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी संस्थानों को अपनी मुट्ठी में रखकर काम करती है। उनके मुताबिक, मतदाता सूचियों से लेकर चुनावी प्रक्रियाओं तक में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है। राहुल गांधी का दावा है कि ये लोग खुद ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलते हैं और इन्हें सबसे ज्यादा डर सच्चाई और निष्पक्षता से लगता है। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगर देश में वाकई निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो बीजेपी आज के हालात में 140 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। यह बयान दर्शाता है कि विपक्ष अब इस चुनावी परिणाम को सिर्फ एक हार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तौर पर देख रहा है।
बंगाल में ‘जनादेश की लूट’ और ममता के गंभीर आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ें बंगाल के हालिया नतीजों में छिपी हैं। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सीधा आरोप लगाया है कि बीजेपी ने बंगाल में 100 से अधिक सीटों पर ‘वोटों की लूट’ की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘बीजेपी आयोग’ तक कह दिया। ममता का कहना है कि उन्होंने समय-समय पर धोखाधड़ी की शिकायतें कीं, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी का 207 सीटों तक पहुंचना और टीएमसी का 80 सीटों पर सिमट जाना, बंगाल की राजनीति में एक दशक से भी ज्यादा समय के बाद हुआ सबसे बड़ा उलटफेर है।
लोकतंत्र के मिशन पर खतरा या सिर्फ हार की हताशा?
राहुल गांधी ने अपने उन साथियों और समर्थकों को भी नसीहत दी है जो भीतर ही भीतर टीएमसी की हार पर खुश हो रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह किसी एक दल की हार या जीत का मसला नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उनके अनुसार, असम और बंगाल में जो हुआ, वह लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में बीजेपी के मिशन का एक हिस्सा है। फिलहाल बंगाल की फाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होना है, जिस पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं। चुनावी नतीजों ने जहां एक तरफ बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल पैदा किया है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में आक्रोश और अविश्वास की लहर दौड़ गई है।


