अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला कुछ ही दिनों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस जांच, एसआईटी कार्रवाई और गिरफ्तारियों तक पहुंच गया। शुरुआत एक आरोप से हुई, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि राज्य सरकार को विशेष जांच दल (SIT) गठित करना पड़ा। अब इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और 8 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। आइए समझते हैं कि पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन क्या रही और अब तक जांच कहां पहुंची है।
7 जून: एक आरोप से शुरू हुआ पूरा विवाद
इस विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई, जब समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में करीब 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की कथित हेराफेरी हुई है।
इसी दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के दान का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है और सभी वित्तीय लेन-देन का नियमित ऑडिट होता है।
हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। विपक्षी दलों ने पारदर्शी जांच की मांग शुरू कर दी, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
विपक्ष के सवाल और PMO तक पहुंचा मामला
आरोप सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। इसी दौरान भाजपा नेता रजनीश सिंह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की।
इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी मंदिर ट्रस्ट से इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। इससे साफ संकेत मिला कि पूरे घटनाक्रम पर केंद्र स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी कहा कि यदि किसी तरह की अनियमितता साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
योगी सरकार ने बनाई SIT, शुरू हुई गहन जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
एसआईटी ने कई दिनों तक राम मंदिर परिसर, दान प्रबंधन व्यवस्था और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, कैश मैनेजमेंट से जुड़े लोगों और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की गई।
जांच में नकदी प्रबंधन, कीमती धातुओं के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अकाउंटिंग प्रक्रिया जैसे कई पहलुओं की पड़ताल की गई।
शुरुआती रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर
23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में कुछ मामलों में आपराधिक जांच की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद मंदिर ट्रस्ट की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
आगे क्या?
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह कानूनी जांच के दायरे में है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, ट्रस्ट की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बरती जाती है। अब सबकी नजर एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।





