रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा? सुप्रीम कोर्ट का MEA को बड़ा निर्देश, 51 मौतों के बाद सिर्फ 6 दावे!

रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा? सुप्रीम कोर्ट का MEA को बड़ा निर्देश, 51 मौतों के बाद सिर्फ 6 दावे!

रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने विदेश मंत्रालय (MEA) से कहा है कि वह सार्वजनिक नोटिस जारी कर ऐसे सभी परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार जानकारी के अभाव में अपने अधिकार से वंचित न रह जाए। मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक 51 भारतीयों की मौत की खबर सामने आने के बावजूद केवल छह परिवारों के मुआवजे के दावे ही सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि प्रभावित परिवारों को रूसी अधिकारियों से मुआवजा पाने की प्रक्रिया में मदद मिले और उन्हें जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

51 भारतीयों की मौत, लेकिन मुआवजे के दावे सिर्फ छह परिवारों ने किए

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह मुआवजे के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करे। कोर्ट ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीय नागरिकों के अन्य परिजनों को भी अपने अधिकारों और मुआवजे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मंत्रालय से यह भी कहा कि वह प्रभावित परिवारों को रूसी अधिकारियों के समक्ष मुआवजे के दावे पेश करने में पूरी मदद करे। साथ ही, एक नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर यह जानकारी दी जाए कि रूसी अधिकारियों ने कितनी मुआवजा राशि तय की है और परिवारों को वास्तव में कितना भुगतान किया गया है।

यह मामला उन 26 भारतीय नागरिकों के परिजनों की याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के सदस्य रोजगार की तलाश में रूस गए थे। वहां उन्हें कथित तौर पर रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भेजा गया। याचिका में भर्ती के दौरान धोखाधड़ी और मानव तस्करी के आरोप भी लगाए गए हैं।

मामले का मानवीय पहलू बेहद गंभीर है। परिवारों को अपने प्रियजनों की मौत या लापता होने की खबर के साथ-साथ मुआवजे की प्रक्रिया में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

मुआवजे के लिए रूस जाना और बैंक खाता खोलना बना बड़ी परेशानी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि रूसी अधिकारी मुआवजे का दावा करने वाले कुछ परिवारों से रूस आने के लिए कह रहे हैं। कुछ मामलों में उन्हें दो बार रूस जाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, वहां बैंक खाते खोलने की शर्त भी परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि प्रत्येक मृत भारतीय नागरिक के मामले में करीब 1.5 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया जा रहा है। लेकिन इतनी बड़ी राशि का दावा करने के बावजूद, प्रक्रिया की जटिलताएं परिवारों के सामने आर्थिक और प्रशासनिक मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।

वकील ने केंद्र सरकार से यह पता लगाने का आग्रह किया कि क्या मुआवजे के आवेदन भारत में रूसी दूतावास के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं। इसके साथ ही, दिल्ली में काम कर रहे रूसी बैंकों में खाते खोलने जैसे विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही गई।

जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अपने सुझावों की सूची तैयार करें और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के साथ उन पर चर्चा करें। इसका उद्देश्य ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तलाशना है, जिससे प्रभावित परिवारों को मुआवजे के लिए बार-बार विदेश न जाना पड़े।

सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिया गया कि रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रहेगी और दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

267 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए, 77 का अब भी पता लगाने की कोशिश

विदेश मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी ताजा स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि लगभग 267 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए थे। इनमें से 139 लोगों को सेना से मुक्त किया जा चुका है, जबकि 51 लोगों की मौत की खबर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि 77 भारतीय नागरिकों का पता लगाया जा सके। इन 77 लोगों में वे सात नागरिक भी शामिल हैं, जिनके लापता होने की पुष्टि रूसी अधिकारियों ने की है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों को मुआवजे के लिए चार आवेदन भेज चुका है। इनमें से एक परिवार को पूरी मुआवजा राशि मिल गई है, जबकि दूसरे परिवार को आंशिक भुगतान हुआ है। इसके अतिरिक्त, चार अन्य परिवारों ने सीधे रूसी अधिकारियों से संपर्क कर मुआवजे की मांग की थी।

31 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। इस अधिकारी की जिम्मेदारी रूस गए उन भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ समन्वय करना है, जिनकी मौत हो गई या जो घायल हुए हैं।

अदालत ने उस समय DNA जांच के जरिए शवों की पहचान कराने, जरूरी दस्तावेजों की जानकारी देने और मुआवजे के दावों के कारण शव परिवारों को सौंपने में देरी नहीं होने देने के निर्देश भी दिए थे।

मुफ्त कानूनी सहायता से लेकर नई एडवाइजरी तक, सरकार को दिए अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। अदालत ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों को 31 जुलाई के निर्देशों का पालन करने को कहा है। इसके तहत परिवारों को मुआवजे के दावे दाखिल करने और DNA जांच कराने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी है।

जस्टिस बागची ने विदेश मंत्रालय से यह भी कहा कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में मानव तस्करी का शिकार हुए भारतीय नागरिकों और नाविकों की मदद के लिए मानक प्रक्रियाएं तथा सहायता योजनाएं तैयार करने पर विचार किया जाए।

विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ भारतीय नागरिक रोजगार, पढ़ाई या पर्यटन वीजा पर रूस गए और बाद में आर्थिक बोनस या अन्य लाभों की उम्मीद में रूसी सेना में शामिल हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस भेजे जाने के बाद दोबारा रूसी सेना में शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।

इसी खतरे को देखते हुए मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को एक और एडवाइजरी जारी की थी। इसमें भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होने से जुड़े जोखिमों के बारे में आगाह किया गया। मंत्रालय ने यह भी सलाह दी कि नौकरी के प्रस्तावों के मामले में केवल मंत्रालय के साथ पंजीकृत एजेंटों पर भरोसा किया जाए।

इसके अलावा, भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि भारतीय नागरिकों को रूसी पासपोर्ट जारी करने से पहले उनसे भारतीय नागरिकता छोड़ने का प्रमाणपत्र मांगा जाए।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से सार्वजनिक नोटिस जारी करने, मुआवजे के दावों में परिवारों की मदद करने और उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने मुआवजे की तय राशि और वास्तविक भुगतान का ब्योरा भी मांगा है।

इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम यही होगा कि पात्र परिवारों तक जानकारी पहुंचे और वे जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने दावे पेश कर सकें। फिलहाल, मुआवजे की पूरी प्रक्रिया और सभी परिवारों को भुगतान मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

Case Title: Divya v. Union of India