नंबर प्लेट ढकने पर नहीं लगेगा चीटिंग का केस! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा

नंबर प्लेट ढकने पर नहीं लगेगा चीटिंग का केस! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा

सड़क पर वाहन चलाते समय नंबर प्लेट साफ और दिखाई देना कानूनी तौर पर जरूरी है। लेकिन अगर किसी वाहन की नंबर प्लेट ढकी हुई मिल जाए, तो क्या उस पर सीधे चीटिंग (धोखाधड़ी) का आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि केवल नंबर प्लेट छिपाने के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 के तहत चीटिंग का मामला नहीं बनता। यह अधिकतम मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत नियमों का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसे आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।

क्या था पूरा मामला, जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद?

यह मामला तेलंगाना का है। एक व्यक्ति अपनी होंडा एक्टिवा स्कूटी चला रहा था, जिसकी पीछे की नंबर प्लेट काले रंग के कवर से ढकी हुई थी। पुलिस गश्त के दौरान उसे रोका गया और आरोप लगाया गया कि उसने ट्रैफिक चालान से बचने और भविष्य में किसी अपराध की स्थिति में पहचान छिपाने के इरादे से नंबर प्लेट ढकी थी।

इसी आधार पर उसके खिलाफ IPC की धारा 420 (चीटिंग) और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। बाद में चार्जशीट दाखिल हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया। आरोपी ने इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द कर दिया चीटिंग का मामला?

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस का यह मान लेना कि नंबर प्लेट इसलिए ढकी गई थी ताकि चालान से बचा जा सके, केवल एक आशंका है। केवल अनुमान के आधार पर किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।

अदालत ने कहा कि चीटिंग का अपराध साबित करने के लिए तीन जरूरी तत्व होने चाहिए—पहला, आरोपी की बेईमानी की मंशा; दूसरा, किसी व्यक्ति को धोखे में रखना; और तीसरा, उस धोखे के कारण किसी को गलत नुकसान या आरोपी को गलत लाभ होना। इस मामले में ऐसा कोई भी तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं था।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि वाहन की केवल पीछे की नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि आगे की नंबर प्लेट पूरी तरह दिखाई दे रही थी। ऐसे में यह कहना कि आरोपी ने पहचान छिपाने की सुनियोजित कोशिश की थी, तथ्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई होगी, लेकिन IPC नहीं लगेगी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नंबर प्लेट को ढकना निश्चित रूप से मोटर वाहन अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन है। इसलिए संबंधित प्राधिकरण जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, ऐसे मामले को जबरन IPC की धारा 420 के तहत चीटिंग का अपराध बनाना कानून की गलत व्याख्या होगी।

अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज चीटिंग का मामला रद्द कर दिया, लेकिन यह भी साफ किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत लगने वाला जुर्माना देना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि जुर्माना अभी तक जमा नहीं किया गया है, तो संबंधित प्राधिकरण के सामने एक महीने के भीतर इसका भुगतान किया जाए।

इस फैसले का आम वाहन चालकों पर क्या असर पड़ेगा?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हर नियम उल्लंघन को आपराधिक अपराध नहीं बनाया जा सकता। यदि किसी मामले में धोखाधड़ी के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं, तो केवल आशंका के आधार पर IPC की गंभीर धाराएं नहीं लगाई जा सकतीं।

हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वाहन चालक नंबर प्लेट ढककर चल सकते हैं। नंबर प्लेट स्पष्ट और पढ़ने योग्य रखना अब भी कानूनी जिम्मेदारी है। यदि कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है।