भारत में आ गई राजनीति की चौथी पीढ़ी, ये नेता चलाएंगे देश

ये वो पीढ़ी है, जो क्वालिफाइड है, सोशल मीडिया के दौर को बखूबी समझती है. युवा उन्हे हीरो मानते हैं, ट्वीटर पर जबरदस्त तरीके से एक्टिव है, लंबी फैन फालोइंग है. नई टेक्नालॉजी समझती है, फैशन के मामले में भी किसी से कम नहीं हैं. आजादी के बाद राजनीति की पहली पीढ़ी जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसे लोग थे. जिनके साथ विपक्ष में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक ओर जहां अक्टूबर, 1951 में जनसंघ की स्थापना की, वहीं दूसरी ओर दलित नेता बी.आर. आम्बेडकर ने अनुसूचित जाति महासंघ (जिसे बाद में रिपब्लिकन पार्टी का नाम दिया गया) को पुनर्जीवित किया.

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भारत में आ गई राजनीति की चौथी पीढ़ी, ये नेता चलाएंगे देश

नई दिल्ली: क्या आज से 10 पहले तक आप सोच सकते थे, कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री तीस चालिस साल की उम्र का हो सकता है, जिसका तजुर्बा राजनीति में सिर्फ कुछ ही सालों का हो. एक या दो बार विधायक और संसद भवन तक पहुंचा हो. क्या ऐसे नेता की पार्टी में ही स्वीकार्यता हो सकती थी. शायद जवाब न में ही होगा. सत्तर बसंत देख चुका भारत जल्द ही, ऐसे नेताओं के हाथ में होगा, जो न सिर्फ युवा हैं, बल्कि परंपरागत ढर्रे के विपरीत राजनीति कर रहे हैं. अगर सबकुछ उम्मीदों के मुताबिक रहा तो ये सब कुछ सालों में ही आपके सबकुछ सामने होगा. क्योंकि भारतीय राजनीति की तीसरी पीढ़ी तेजी से रिटायर हो रही है. तो चौथी पीढ़ी सत्ता संभालने और स्मार्ट तरीके से राजनीति करने के लिए आतुर है.

वेल ट्रेंड होंगे नए नेता

ये वो पीढ़ी है, जो क्वालिफाइड है, सोशल मीडिया के दौर को बखूबी समझती है. युवा उन्हे हीरो मानते हैं, ट्वीटर पर जबरदस्त तरीके से एक्टिव है, लंबी फैन फालोइंग है. नई टेक्नालॉजी समझती है, फैशन के मामले में भी किसी से कम नहीं हैं. आजादी के बाद राजनीति की पहली पीढ़ी जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसे लोग थे. जिनके साथ विपक्ष में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक ओर जहां अक्टूबर, 1951 में जनसंघ की स्थापना की, वहीं दूसरी ओर दलित नेता बी.आर. आम्बेडकर ने अनुसूचित जाति महासंघ (जिसे बाद में रिपब्लिकन पार्टी का नाम दिया गया) को पुनर्जीवित किया.

दूसरी पीढ़ी इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई, जय प्रकाश नारायण लोहिया जैसे लोग थे. जो सक्रीय राजनीति में आए और काम किया. तीसरी पीढ़ी में इमरजेंसी के बाद मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, राजीव गांधी, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, अजीत सिंह, मायावती जैसी नेताओं का उदभव हुआ. इसके बाद अब बारी चौथी पीढ़ी की है. जो स्मार्ट फोन और कम्प्यूटर फोर जी के जमाने के हैं. जो सोशल मीडिया से चुनाव की आधी लड़ाई लड़ते नजर आएंगे.

यूपी से हुई शुरुआत

बात यूपी के शुरु करें तो अखिलेश यादव का नाम सबसे ऊपर आता है, जो युवाओं में काफी पसंद किए जाते हैं. तीन बार सांसद बने और 26 साल की उम्र में उपचुनाव जीतकर संसद पहुंचे और सिर्फ बारह साल के निर्वाचित राजनीतिक अनुभव के बाद देश के सबसे बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री बनकर पांच साल तक राज किया और आज समाजवादी पार्टी के मुखिया बनकर पार्टी चला रहे हैं. राष्ट्रीय राजनीति में दखल और पीएम बनने का सपना तक देख रहे हैं.

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यूपी में वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ भी पचास साल से कम उम्र के हैं. 26 साल में ही योगी सांसद बने और सबसे कम उम्र के सांसदों की सूची में अपना नाम दर्ज कराया. लगातार पांच सासंद बने आदित्यनाथ 1998 में पहली बार गोरखपुर से सांसद बने. फिर उन्होने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और 1999, 2004, 2009 और 2014 में गोरखपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित होते रहे।

बिहार में युवा बयार

 

बिहार की तरफ रुख करें, तो आरजेडी के संस्थापक लालू प्रसाद यादव अब लगभग रिटायर्ड हो चुके हैं. और उनके बेटे तेजस्वी तेजी से पार्टी के साथ बिहार की राजनीति में सक्रीय है, पहली बार विधायक बने और कई विभागों के मंत्री पद कुछ महीनों तक संभाला. वहीं दूसरी तरफ लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान भी अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे चिराग पासवान को सौंपने को तैयार है. जबकि वर्तमान सीएम नीतीश कुमार ने भी जदयू के लिए प्रशांत कुमार के रूप में उत्तराधिकारी ढूंढ लिया है. जो पार्टी उपाध्यक्ष बन चुके हैं, 2019 में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

राजस्थान में होगा युवा राज !

राजस्थान में और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ें तो आने वाले चुनाव में अगर करिश्मा दिखा और कांग्रेस ने जीत हासिल की तो राजस्थान में सचिन पायलेट के हाथों में सत्ता सौंपी जा सकती है. वहीं मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को सिंहासन हासिल होने की संभावना है. यानी दोनों प्रदेशों में तमाम बुजुर्ग नेताओं को पीछे छोड़कर कांग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गांधी की गुड बुक में रहते हुए प्रदेश की कमान संभालने को तैयार हैं.

कश्मीर से कन्या कुमारी तक नई तस्वीर

 

कश्मीर में भी पीडीपी की महबूबा मुफ्ती पिता मोहम्मद सईद की मृत्यु के बाद सीएम बन चुकी हैं. नेकां की कमान भी पूरी तरह से उमर अबदुल्ला संभाल चुके हैं. पिता राज्य की राजनीति लगभग छोड़ चुके हैं. महाराष्ट्र में भी देवेंद्र फडनवीस के हाथों में सत्ता है, तो उनके सहयोगी रहे शिवसेना के उद्धव ठाकरे भी युवाओं की श्रेणी में ही हैं. उनके भाई राज ठाकरे भी लगातार अपने संगठन और एमएनएस नाम की पार्टी को बढ़ाने में लगे हैं.

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गुजरात में मोदी के केंद्र में आने के बाद बीजेपी को नई उम्र के लड़के टक्कर दे रहे हैं अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाड़ी जैसे नेता उभर रहे हैं. दक्षिण भारत में सालों तक जयललिता और एम करुणानिधि का युग खत्म हो चुका है. दयानिधी अणागिरि और उदयनिधि स्टालिन का दौर शुरु हो गया है. आंध्र प्रदेश में वाईएसआर जगमोहन रेड्डी भी धीरे धीरे ही सही राजनीतिक तौर पर मजबूत होने की कोशिश कर रहे हैं. हालंकि कांग्रेस राज में घोटाले के आरोप में लंबे समय तक जेल में बंद रहे.

पूरब में त्रिपुरा राज्य की कमान बीजेपी के विप्लव देव संभाल रहे हैं, जिनकी उम्र अभी 46 साल है. अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी के पेमा खांडू सीएम पद पर आसीन हैं, उनकी उम्र अभी 39 साल ही है.

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