उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी ने संगठन को चुनावी मोड में लाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 6 क्षेत्रीय प्रभारियों और 7 मोर्चा प्रभारियों की नई जिम्मेदारियों का ऐलान किया है। इसके साथ ही पार्टी मुख्यालय, मीडिया, विस्तारक योजना और ‘मन की बात’ जैसे महत्वपूर्ण कामों के लिए भी नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। पार्टी के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजेपी ने अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच मजबूत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है। नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ महिला प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिखाई देता है। अब इन नेताओं की भूमिका संगठन के कामकाज को तेज करने और चुनावी तैयारियों को बूथ स्तर तक पहुंचाने में अहम हो सकती है।
भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त क्षेत्र एवं मोर्चा प्रभारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। pic.twitter.com/wqhgwOdTZv
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) August 8, 2026
छह क्षेत्रों की कमान वरिष्ठ नेताओं के हाथों में
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश को अलग-अलग संगठनात्मक क्षेत्रों में देखते हुए छह नेताओं को क्षेत्रीय प्रभारी बनाया है। पार्टी ने पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र के लिए नई जिम्मेदारियां तय की हैं।
नई सूची के मुताबिक:
- रामप्रताप सिंह चौहान — प्रदेश महामंत्री, पश्चिम क्षेत्र
- गीता शाक्य — प्रदेश महामंत्री, ब्रज क्षेत्र
- शंकर लोधी — प्रदेश महामंत्री, कानपुर क्षेत्र
- दिलीप पटेल — प्रदेश महामंत्री, अवध क्षेत्र
- रमेश सिंह — प्रदेश उपाध्यक्ष, काशी क्षेत्र
- अभिजात मिश्रा — प्रदेश महामंत्री, गोरखपुर क्षेत्र
इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संगठन की जिम्मेदारी अनुभवी पदाधिकारियों को सौंपी है। चुनाव से पहले क्षेत्रीय संगठन का मजबूत होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यही स्तर प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय संगठन के बीच समन्वय का काम करता है।
सात मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय, सामाजिक समीकरण पर नजर
क्षेत्रीय प्रभारियों के साथ बीजेपी ने विभिन्न मोर्चों के लिए भी नेताओं की जिम्मेदारी घोषित की है। इनमें युवा, पिछड़ा, अनुसूचित, महिला, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चे शामिल हैं।
जारी जानकारी के मुताबिक:
- राजेश चौधरी — प्रदेश महामंत्री, युवा मोर्चा
- संजय राय — प्रदेश महामंत्री, पिछड़ा मोर्चा
- डॉ. धर्मेंद्र सिंह — प्रदेश उपाध्यक्ष, अनुसूचित मोर्चा
- कामेश्वर सिंह — प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा
- डॉ. प्रियंका रावत — प्रदेश उपाध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति मोर्चा
- देवेश कोरी — प्रदेश उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक मोर्चा
- शंकर गिरी — प्रदेश उपाध्यक्ष
इन नियुक्तियों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि 2027 के चुनाव में बीजेपी के सामने अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की चुनौती होगी।
लखनऊ मुख्यालय से मीडिया तक, संगठन में और भी बदलाव
बीजेपी ने सिर्फ क्षेत्र और मोर्चों तक बदलाव सीमित नहीं रखा है। लखनऊ स्थित प्रदेश बीजेपी कार्यालय की जिम्मेदारी भी नए सिरे से तय की गई है।
एमएलसी गोविंद नारायण शुक्ला को पार्टी मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं यतेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम के लिए अर्चना मिश्रा को संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है।
इन जिम्मेदारियों का सीधा संबंध पार्टी के संगठनात्मक संचालन, मीडिया मैनेजमेंट और जमीनी विस्तार से है। चुनावी साल से पहले बीजेपी अपने संगठन के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारियां स्पष्ट कर रही है।
2027 के लिए बीजेपी की रणनीति में संगठन क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से तैयारियां तेज हो गई हैं। बीजेपी लगातार अपने संगठन को चुनावी जरूरतों के हिसाब से तैयार कर रही है। पार्टी के सामने सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी की चुनौती है।
बीजेपी का फोकस अपने पारंपरिक वोट आधार को मजबूत रखने के साथ-साथ पिछड़ी जातियों और अन्य सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूला बीजेपी के लिए एक प्रमुख राजनीतिक चुनौती के रूप में सामने है।
ऐसे में क्षेत्रीय प्रभारी और विभिन्न मोर्चों के प्रभारी केवल संगठनात्मक पदाधिकारी नहीं होंगे। आने वाले समय में इनकी भूमिका पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक संपर्क अभियान में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अभी विधानसभा चुनाव में समय है, लेकिन बीजेपी ने संगठन के स्तर पर अपनी तैयारी तेज कर दी है। नई नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने यह संकेत जरूर दिया है कि 2027 की लड़ाई के लिए संगठन को पहले से सक्रिय और जिम्मेदारियों के लिहाज से तैयार किया जा रहा है।




