उत्तर प्रदेश में CNG से वाहन चलाने वालों के लिए एक बार फिर खर्च बढ़ गया है। ग्रीन गैस लिमिटेड ने लखनऊ और आगरा में CNG की कीमत ₹3 प्रति किलो बढ़ा दी है। वहीं अयोध्या, उन्नाव और सुल्तानपुर में यह बढ़ोतरी ₹2 प्रति किलो की गई है। नई दरें 8 अगस्त 2026 से लागू हो चुकी हैं। खास बात यह है कि पिछले चार महीनों में CNG के दाम में कुल ₹8.25 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। यानी रोजाना CNG से सफर करने वाले लोगों के लिए ईंधन का बजट लगातार बढ़ रहा है।
इसका असर सिर्फ निजी कार चलाने वालों तक सीमित नहीं है। ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए CNG रोज के कारोबार का अहम हिस्सा है। ईंधन महंगा होने पर उनकी परिचालन लागत बढ़ती है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर इसका असर कमाई, बचत और यात्रियों से लिए जाने वाले किराये पर भी पड़ सकता है।
लखनऊ-आगरा में सबसे ज्यादा बढ़ा बोझ
नई कीमतों का सबसे बड़ा असर लखनऊ और आगरा में देखने को मिला है। इन दोनों शहरों में CNG ₹3 प्रति किलो महंगी हुई है। दूसरी ओर अयोध्या, उन्नाव और सुल्तानपुर में ग्राहकों को अब प्रति किलो ₹2 ज्यादा भुगतान करना होगा।
CNG वाहन चालकों के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईंधन का खर्च रोजाना की कमाई से सीधे जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर कोई ऑटो या टैक्सी चालक दिनभर लगातार वाहन चलाता है तो कुछ रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी भी महीने के अंत तक उसके कुल खर्च में बड़ा अंतर पैदा कर सकती है।
निजी वाहन मालिकों के लिए भी तस्वीर अलग नहीं है। जिन लोगों को रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, उनके मासिक फ्यूल बजट पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
चार महीने में ₹8.25 तक महंगी हुई CNG
CNG की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मई से अगस्त के बीच अलग-अलग चरणों में CNG के दाम कुल ₹8.25 प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं।
लगातार हो रही बढ़ोतरी ने CNG को लेकर वाहन चालकों की लागत का दबाव बढ़ा दिया है। खासकर उन लोगों के लिए मुश्किल ज्यादा है जिनकी रोजमर्रा की आय वाहन चलाने पर निर्भर करती है।
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल पंप पर भुगतान तक नहीं रहता। व्यावसायिक वाहन चालक अपने दूसरे खर्चों के साथ ईंधन लागत का हिसाब लगाते हैं। अगर यह लागत लगातार बढ़ती है तो कमाई का एक बड़ा हिस्सा फ्यूल पर खर्च होने लगता है।
ऑटो-टैक्सी के किराये पर भी पड़ सकता है असर
CNG महंगी होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की होती है कि इसका असर ऑटो, टैक्सी और कैब के किराये पर पड़ेगा या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी नए किराये की पुष्टि नहीं है, लेकिन वाहन संचालन की लागत बढ़ने से परिवहन सेवाओं पर दबाव जरूर बढ़ता है।
ऑटो और टैक्सी चालकों के सामने आम तौर पर दो विकल्प होते हैं। वे बढ़ी हुई ईंधन लागत को अपनी कमाई में समायोजित करें या फिर सेवा की कीमत में बदलाव की मांग करें। इसका असर आगे चलकर यात्रियों के सफर के खर्च पर पड़ सकता है।
लखनऊ और आगरा जैसे शहरों में रोज बड़ी संख्या में लोग ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में CNG की कीमत में लगातार बढ़ोतरी आम परिवारों के मासिक परिवहन बजट को प्रभावित कर सकती है।
निजी कार वालों को भी अब ज्यादा खर्च करना होगा
इस बढ़ोतरी का असर केवल कमर्शियल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। अयोध्या, उन्नाव, सुल्तानपुर, लखनऊ और आगरा में CNG कार इस्तेमाल करने वाले निजी वाहन मालिकों को भी अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना होगा।
जिन लोगों का रोज का सफर छोटा है, उनके लिए तत्काल असर सीमित रह सकता है। लेकिन रोज लंबी दूरी तय करने वाले कर्मचारियों, कारोबारियों और अन्य वाहन मालिकों के लिए महीने का कुल ईंधन खर्च तेजी से बढ़ सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लगातार बढ़ती लागत को लेकर है। पिछले चार महीनों में ₹8.25 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी के बाद CNG वाहन चालकों को अपने मासिक बजट की फिर से गणना करनी पड़ेगी। वहीं व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए ईंधन लागत और कमाई के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।



