अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा दुख है और इसे ट्रस्ट के लिए शर्मनाक बताया, लेकिन उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में पद छोड़ना समाधान नहीं है। इसके बजाय व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
‘मैं भागने वालों में नहीं’, इस्तीफे की खबरों को बताया गलत
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंद देव गिरी ने कहा कि पिछले कुछ समय से मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के अनुयायी हैं और कठिन परिस्थितियों से पीछे हटने में विश्वास नहीं रखते।
उन्होंने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर में ऐसी घटना होना बेहद पीड़ादायक है और इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते वह नैतिक जिम्मेदारी महसूस करते हैं और इसे अपने लिए भी आत्ममंथन का विषय मानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं, बल्कि व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
SIT जांच पर जताया भरोसा, सुरक्षा व्यवस्था में होंगे कई बदलाव
गोविंद देव गिरी ने कहा कि कथित चोरी के मामले की एसआईटी जांच चल रही है और उन्हें जांच प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है और अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे।
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट अब दान की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव करेगा। दान की गिनती के दौरान लागू होने वाले ड्रेस कोड को सख्ती से लागू किया जाएगा। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कैमरे किसी भी परिस्थिति में बंद न हों। इसके अलावा नकदी गिनने की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा और बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की तलाशी भी ली जाएगी।
दान राशि, संपत्ति और जिम्मेदारी पर भी दिया जवाब
कोषाध्यक्ष ने कहा कि दान के रूप में प्राप्त होने वाली राशि के संग्रहण का प्रत्यक्ष संचालन स्थानीय ट्रस्टियों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से नियुक्त कर्मचारियों के माध्यम से किया जाता था। उन्होंने कहा कि आय-व्यय की निगरानी उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए नियमित रूप से खातों का ऑडिट भी कराया जाता है।
उन्होंने चोरी की रकम को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग दावों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, उनकी जानकारी में कथित चोरी की राशि लगभग तीन करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है, जबकि इससे अधिक रकम बताए जाने वाले दावे सही नहीं हैं।
गोविंद देव गिरी ने यह भी कहा कि उनके नाम पर किसी प्रकार की अतिरिक्त संपत्ति होने संबंधी खबरें तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके नाम पर केवल एक बैंक खाता है और मीडिया में उनके बारे में कई भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गई हैं।
श्रद्धालुओं का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी प्राथमिकता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा मजबूत करना ट्रस्ट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने व्यक्तिगत धार्मिक अनुष्ठानों और जप की संख्या भी बढ़ाई है। साथ ही मंदिर में 70 पंडितों द्वारा 10 दिनों तक विशेष अनुष्ठान कराया जाएगा।
उन्होंने सिंधी समाज की ओर से दान की गई 200 सोने की ईंटों को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उनके अनुसार, ट्रस्ट ने इस संबंध में प्राप्त पत्र का उत्तर दिया था और बाद में संबंधित पक्ष ने भी स्पष्ट किया कि यह बात भूलवश कही गई थी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की ओर से 2,926 दान की गई वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जा चुका है।
गोविंद देव गिरी ने अंत में कहा कि इस मामले का किसी राजनीतिक दल या संगठन से संबंध जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।


