उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी (सपा) भी अपनी चुनावी रणनीति को लगातार नया रूप दे रही है। अब तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) के फार्मूले पर जोर देने वाली पार्टी ने पहली बार खुलकर ब्राह्मण समाज की ओर भी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी कर ली है। 5 अगस्त को जनेश्वर मिश्र की जयंती पर लखनऊ में आयोजित होने वाला विशाल सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विस्तार के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
जनेश्वर मिश्र जयंती के बहाने बड़ा राजनीतिक संदेश
समाजवादी पार्टी की ओर से 5 अगस्त को लखनऊ में बड़े सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत जनेश्वर मिश्र पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण से होगी। इसके बाद पार्टी मुख्यालय में विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
इस आयोजन में काशी, अयोध्या और मथुरा से संत, विद्वान और ब्राह्मण समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। मंच पर वैदिक मंत्रोच्चार होगा और अखिलेश यादव विभिन्न संतों तथा विद्वानों का सम्मान करेंगे। पार्टी का दावा है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
हालांकि पहले यह आयोजन जनेश्वर मिश्र पार्क में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे पार्टी मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं, जिनमें जर्मन हैंगर, भोजन व्यवस्था और शहरभर में प्रचार अभियान भी शामिल है।
PDA के साथ अब ब्राह्मण समीकरण पर भी फोकस
पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ लेकर चुनावी रणनीति बना रही है। लेकिन अब पार्टी को लगता है कि 2027 के चुनाव में व्यापक सामाजिक समर्थन हासिल करने के लिए दूसरे प्रभावशाली वर्गों तक भी पहुंच बनानी होगी।
इसी सोच के तहत ब्राह्मण समाज के बीच संवाद बढ़ाने की तैयारी की गई है। सम्मेलन की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को दी गई है, जबकि बलिया से सांसद सनातन पांडेय कार्यक्रम के संयोजक बनाए गए हैं। पार्टी नेताओं ने पिछले कई महीनों में अलग-अलग जिलों और मंडलों में बैठकें कर सम्मेलन की तैयारी की है। खास तौर पर पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में ब्राह्मण समाज तक निमंत्रण पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
100 से ज्यादा सीटों के समीकरण पर नजर
समाजवादी पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज की आबादी लगभग 13 से 14 प्रतिशत मानी जाती है और इसका प्रभाव 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर देखा जाता है। यही वजह है कि पार्टी इस वर्ग तक अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक विषयों को भी उठाने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि यह पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य चुनाव से पहले अपने पक्ष में माहौल बनाना माना जा रहा है।
2027 चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
जनेश्वर मिश्र समाजवादी राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं। उन्हें ‘छोटे लोहिया’ के नाम से भी पहचान मिली थी। समाजवादी पार्टी अब उनकी राजनीतिक विरासत को नए तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की ताकत दिखाने का भी प्रयास है। इसके जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि उसकी राजनीति अब केवल PDA तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के अन्य प्रभावशाली वर्गों के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
अब इस आयोजन का राजनीतिक असर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में सामाजिक समीकरणों की नई बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है और सभी दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं।



