गंगा एक्सप्रेसवे से जेवर एयरपोर्ट तक… योगी सरकार ने खोला खजाना, जानिए किस प्रोजेक्ट को मिले कितने करोड़

गंगा एक्सप्रेसवे से जेवर एयरपोर्ट तक… योगी सरकार ने खोला खजाना, जानिए किस प्रोजेक्ट को मिले कितने करोड़

उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश बढ़ाने वाली परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इस बजट का मकसद सिर्फ नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि प्रदेश में निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और औद्योगिक गतिविधियों को तेज करना भी है। सबसे ज्यादा चर्चा गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार, विंध्य एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और नए इंडस्ट्रियल एरिया के लिए किए गए बड़े बजटीय प्रावधानों की हो रही है।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार, गंगा एक्सप्रेसवे होगा और लंबा

योगी सरकार ने इस बार सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए निर्माण कार्य हेतु 80 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए 5,700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हेतु 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट रखा गया है। इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होगी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

विंध्य एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर सरकार का बड़ा दांव

अनुपूरक बजट में विंध्य एक्सप्रेसवे सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। इसके निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए 6,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं विंध्य एक्सप्रेसवे लिंक परियोजना के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये तथा भूमि अधिग्रहण के लिए 2,300 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं।

सरकार एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देना चाहती है। इसी उद्देश्य से अमरोहा, फिरोजाबाद, अमेठी, सुल्तानपुर, बदायूं, इटावा, महोबा, हमीरपुर, जालौन और उन्नाव समेत कई जिलों में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

निवेश, आईटी और औद्योगिक विकास के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान

सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एफडीआई एवं फॉर्च्यून-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत 1,302.61 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना है।

औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और मौजूदा क्षेत्रों के विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं।

BHAVYA (भारतीय औद्योगिक विकास योजना) के तहत हरदोई, बाराबंकी, प्रयागराज, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, बदायूं और झांसी समेत कई जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 495.86 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

आईटी, हेल्थ और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खास जोर

सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में भी कई अहम घोषणाएं की हैं। स्टेट डेटा सेंटर 2.0 की स्थापना के लिए 51 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश आईटी संस्थान की स्थापना के लिए 50.02 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं नए कार्यालय भवनों के निर्माण और भूमि खरीद के लिए 119 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ऑक्सीजन उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2021 के तहत 40.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी दिया गया है। कोविड महामारी के बाद मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इसके अलावा नोएडा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एलिवेटेड फ्लाईओवर निर्माण हेतु 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर सरकार का यह अनुपूरक बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इनका सीधा असर प्रदेश की कनेक्टिविटी, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाला है।