उत्तर प्रदेश अब सिर्फ बड़ी आबादी और विशाल बाजार के लिए नहीं, बल्कि AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और डीप-टेक जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। राज्य सरकार की रणनीति में तकनीक को युवाओं के कौशल, निवेश और रोजगार से जोड़ने पर जोर है। सरकार का दावा है कि इसी दिशा में AI सिटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर यूनिट, रोबोटिक्स पार्क और IT सिटी जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस पूरी रणनीति का फोकस सिर्फ कंपनियां लाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा लक्ष्य राज्य के युवा कार्यबल को नई तकनीकों के लिए तैयार करना और उत्तर प्रदेश को तकनीक के इस्तेमाल से आगे बढ़ाकर उसके निर्माण और उत्पादन का केंद्र बनाना है।
युवा आबादी को टेक्नोलॉजी से जोड़ने की तैयारी
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल युवा आबादी है। सरकार की सोच है कि अगर इस कार्यबल को आधुनिक तकनीक और जरूरी कौशल से जोड़ा जाए तो यही आबादी आर्थिक विकास का बड़ा आधार बन सकती है।
इसी लक्ष्य के तहत लखनऊ में एक बड़ी AI City विकसित करने के लिए जमीन चिह्नित किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा राज्य में सात Centres of Excellence युवाओं को AI, ब्लॉकचेन और 5G-6G जैसी तकनीकों से जुड़े कौशल देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टेक्नोलॉजी सेक्टर में सिर्फ पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं होती। उद्योगों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है जो नई तकनीकों को समझ सकें और उन्हें व्यावहारिक काम में इस्तेमाल कर सकें।
राज्य की रणनीति इसी कौशल अंतर को कम करने पर भी केंद्रित दिखाई देती है।
डेटा सेंटर से सेमीकंडक्टर तक बड़ा निवेश
डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश में भी इस क्षेत्र में बड़े निवेश की योजना बताई गई है।
गाजियाबाद के CEL परिसर में 30 मेगावाट क्षमता वाला ग्रीन डेटा सेंटर स्थापित किया गया है। इसमें स्मार्ट कूलिंग और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा करीब ₹30,000 करोड़ के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पहले से मौजूद औद्योगिक और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण यह क्षेत्र बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी राज्य ने अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश की है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में ₹3,500 करोड़ से अधिक के निवेश वाली सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला रखे जाने की जानकारी दी गई है।
स्रोत-पाठ के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 जारी करने वाला देश का चौथा राज्य बना। YEIDA के सेक्टर-28 में इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित सुविधा को इसी दिशा में एक अहम परियोजना के रूप में बताया गया है।
मोबाइल निर्माण में यूपी की बड़ी हिस्सेदारी का दावा
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग उत्तर प्रदेश की टेक्नोलॉजी रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोन में से 55 फीसदी का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। वहीं, देश की 60 फीसदी से अधिक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण इकाइयों की मौजूदगी राज्य में बताई गई है।
राज्य में 200 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां, ₹43,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश और तीन लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का दावा भी किया गया है।
LG, Haier, Dixon और Samsung जैसी कंपनियों की मौजूदगी को राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विस्तार के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के तहत ₹3,800 करोड़ से अधिक के निवेश का उल्लेख किया गया है।
अगर ये निवेश और परियोजनाएं तय योजनाओं के मुताबिक आगे बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, सर्विस सेक्टर और स्थानीय रोजगार के लिए भी अवसर बन सकते हैं।
AI और इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ रक्षा उत्पादन पर भी फोकस
उत्तर प्रदेश की टेक्नोलॉजी रणनीति में रक्षा उत्पादन को भी शामिल किया गया है। लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट स्थापित किए जाने का उल्लेख किया गया है, जहां ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण की बात कही गई है।
इसके साथ डिजिटल सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में भी कई योजनाओं का जिक्र है। ई-साथी मोबाइल ऐप के जरिए 24 से ज्यादा सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वहीं 2,066 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी पहुंचने का दावा किया गया है।
प्रोजेक्ट गंगा के जरिए करीब 20 लाख ग्रामीण और अर्ध-शहरी घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की योजना भी बताई गई है।
यानी तकनीकी विकास का एक हिस्सा बड़े शहरों में AI और सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने से जुड़ा है, तो दूसरा हिस्सा डिजिटल कनेक्टिविटी को छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाने से।
जेवर एयरपोर्ट से IT सिटी तक तैयार हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर
टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग निवेश के लिए केवल नीति पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक जमीन जैसी सुविधाओं की भी जरूरत होती है।
इसी संदर्भ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को राज्य के औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ में रोबोटिक्स और AI कंप्यूटिंग पार्क विकसित करने की योजना का भी उल्लेख है। वहीं लखनऊ में 100 एकड़ की HCL IT City और सात STPI IT पार्कों के जरिए IT सेक्टर में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।
स्रोत-पाठ के मुताबिक IT Policy के तहत ₹7,000 करोड़ से अधिक के निवेश का भी उल्लेख किया गया है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की मौजूदा टेक्नोलॉजी रणनीति को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है—एक तरफ AI और डीप-टेक जैसी नई तकनीक, दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और तीसरी तरफ डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा।
अगर इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन तय लक्ष्यों के मुताबिक होता है, तो राज्य के लिए अगली चुनौती सिर्फ निवेश आकर्षित करना नहीं होगी। असली परीक्षा यह होगी कि इन परियोजनाओं से कितने स्थायी रोजगार बनते हैं, स्थानीय युवाओं को कितना कौशल मिलता है और उत्तर प्रदेश वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में कितनी मजबूत भूमिका बना पाता है।



