उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए भोर में चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। विभागीय टीम द्वारा तड़के घर-घर छापेमारी किए जाने से नाराज ग्रामीणों ने बिजलीघर का घेराव कर जूनियर इंजीनियर (जेई) को करीब डेढ़ घंटे तक अपने बीच धूप में बैठाए रखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाइश के बाद जेई को वहां से सुरक्षित निकाला।
जानकारी के अनुसार, निरपुड़ा गांव के बिजलीघर पर तैनात जेई संतोष कुमार अपनी टीम के साथ तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान कई घरों पर जांच की गई, जिससे ग्रामीण नाराज हो गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती हो रही है। उनका कहना है कि रातभर पर्याप्त बिजली नहीं मिलती और लोई फीडर पर पिछले तीन दिनों में केवल तीन से चार घंटे ही आपूर्ति हुई है। वहीं, दोघट फीडर की लाइन भी कई दिनों से खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग खराब लाइनें ठीक करने में देरी करता है, लेकिन छापेमारी के लिए रात में पहुंच जाता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बकाया बिजली बिल के नाम पर उपभोक्ताओं पर दबाव बनाया जाता है। विरोध स्वरूप उन्होंने गुरुवार को बिजलीघर पर बड़ी पंचायत बुलाने का फैसला किया है।
वहीं, जेई संतोष कुमार ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए धन मांगने के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि वे उच्च अधिकारियों के निर्देश पर बिजली चोरी रोकने के लिए रात्रिकालीन अभियान चला रहे थे। उधर, संबंधित एसडीओ ओमबीर सिंह ने कहा कि उन्हें जेई को बंधक बनाए जाने की जानकारी नहीं है।
बिजली विभाग का कहना है कि कई उपभोक्ता रात के समय मीटर को बाईपास कर या कटिया डालकर बिजली चोरी करते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए देर रात और भोर के समय विशेष अभियान चलाया जाता है।




