राम मंदिर चढ़ावा मामले में नया खुलासा, SIT को ‘रामराज्य कोष’ लिखी दान पेटी और QR कोड मिला

राम मंदिर चढ़ावा मामले में नया खुलासा, SIT को ‘रामराज्य कोष’ लिखी दान पेटी और QR कोड मिला

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) को एक अहम सुराग हाथ लगा है। जांच के दौरान मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के घर से “रामराज्य कोष” लिखी एक लकड़ी की दान पेटी और उस पर लगा एक QR कोड बरामद किया गया है। पुलिस को आशंका है कि इस QR कोड और दान पेटी का इस्तेमाल मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं से कथित रूप से अवैध चंदा जुटाने के लिए किया जाता था।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद QR कोड किस बैंक खाते से जुड़ा था, इसके माध्यम से कितनी राशि प्राप्त हुई और इस व्यवस्था के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। डिजिटल लेनदेन की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

इस मामले में अदालत ने SIT को जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया है। शुरुआती जांच में चढ़ावे के कैश मैनेजमेंट, सीसीटीवी निगरानी और कर्मचारियों के सत्यापन से जुड़ी व्यवस्थाओं में कई खामियां सामने आने की बात भी कही गई है। इसके अलावा चढ़ावे की गिनती से जुड़े निजी एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

हालांकि, इस बरामदगी को लेकर एक अलग पक्ष भी सामने आया है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, स्वयंसेवक सुंदरलाल ने दावा किया कि यह दान पेटी वर्ष 2017-18 की है। उनके मुताबिक, राम मंदिर निर्माण के समर्थन में निकाली गई 71 दिनों की यात्रा के दौरान दान संग्रह के लिए यह पेटी मिली थी और तब से यह उनके गुरुजी के पास सुरक्षित रखी हुई थी। उन्होंने किसी अवैध उपयोग के आरोप की पुष्टि नहीं की।

इससे पहले की छापेमारी में पुलिस मुख्य आरोपी के घर से नकदी भी बरामद कर चुकी है। जांच के दौरान कुछ सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, बरामद दान पेटी और QR कोड की वास्तविक भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।