दिल्ली PG हादसे में बड़ी कार्रवाई, मालिक के बेटे समेत 3 आरोपी पुलिस कस्टडी में, बेसमेंट की मरम्मत बनी जांच का अहम बिंदु

दिल्ली PG हादसे में बड़ी कार्रवाई, मालिक के बेटे समेत 3 आरोपी पुलिस कस्टडी में, बेसमेंट की मरम्मत बनी जांच का अहम बिंदु

दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे में जांच अब तेज होती दिख रही है। पांच मंजिला PG बिल्डिंग ढहने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश गुप्ता, PG ऑपरेटर सुधांशु और बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर सानोज को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस ने तीनों की तीन दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दो दिन की कस्टडी मंजूर की।

यह वही हादसा है जिसने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे लड़कों के लिए चल रहा यह PG अचानक ढह गया था। हादसे में कई छात्रों की मौत और घायल होने की खबर सामने आई थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इमारत की हालत इतनी खराब कैसे हुई और बेसमेंट में चल रहा काम हादसे की वजह बना या नहीं।

मालिक के बेटे समेत तीन लोगों से होगी पूछताछ

बुधवार को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कौतिक भारद्वाज की अदालत में आरोपियों को पेश किया गया। पुलिस ने जांच के लिए तीन दिन की कस्टडी मांगी थी। अदालत ने महेश गुप्ता, सुधांशु और सानोज को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

इससे पहले 7 सितंबर को बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। महेश को उस समय दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली थी, जिसकी अवधि अब खत्म हो गई थी। इसके बाद उन्हें दो अन्य आरोपियों के साथ फिर पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, PG की बिजली का कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर है। आरोप है कि महेश बिल्डिंग के मैनेजमेंट का काम देखते थे। वहीं, दस्तावेजों में संपत्ति उनकी मां उर्मिला के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।

बेसमेंट में मरम्मत के दौरान ढही पूरी बिल्डिंग

हादसे की जांच में बेसमेंट में चल रहा मरम्मत का काम एक अहम पहलू बन गया है। जानकारी के मुताबिक, जिस समय पांच मंजिला बिल्डिंग गिरी, उस वक्त बेसमेंट में काम चल रहा था।

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था। इससे इमारत का स्ट्रक्चर कमजोर हुआ हो सकता है। हालांकि, पानी भरने और बिल्डिंग गिरने के बीच वास्तविक कारण क्या था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, बिल्डिंग के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने MCD से पूछा- बिल्डिंग की अनुमति थी या नहीं?

हादसे के बाद मामला सिर्फ पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी प्रशासन को प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए प्रयास तेज करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने MCD को मामले को अपने सबसे वरिष्ठ कार्यकारी स्तर पर ले जाने और यह जांचने का निर्देश दिया है कि जिस इमारत में PG चल रहा था, उसका निर्माण वैध अनुमति के साथ हुआ था या नहीं।

अगर जांच में यह सामने आता है कि निर्माण के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी, तो MCD को जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका तय करनी होगी। यानी जांच का दायरा अब सिर्फ बिल्डिंग मालिक और अन्य आरोपियों तक सीमित नहीं है। निर्माण और अनुमति की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है।

छात्रों के लिए हॉस्टल की मांग भी पहुंची हाईकोर्ट

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के रहने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद DU के सभी कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका यानी PIL भी दाखिल की गई है।

छात्रों के लिए सुरक्षित और उचित आवास की कमी के बीच बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और हॉस्टल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सत्य निकेतन की घटना ने केवल एक इमारत की सुरक्षा का सवाल नहीं उठाया है, बल्कि यह भी सामने ला दिया है कि छात्रों के रहने वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा, अनुमति और रखरखाव की नियमित जांच कितनी जरूरी है।

फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। इस पूछताछ में बिल्डिंग के रखरखाव, बेसमेंट में चल रहे काम, PG के संचालन और हादसे से पहले की परिस्थितियों से जुड़े सवाल अहम रहेंगे। वहीं MCD की जांच से यह भी साफ हो सकेगा कि पांच मंजिला इमारत का निर्माण और उसका इस्तेमाल संबंधित मंजूरियों के अनुरूप था या नहीं।