योगी राज में राजधानी की पुलिस ही बने गुंडा, तो बाकी जिलों का क्या पूछें हाल !

बीते दिनों अफसरों ने 1 जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2018 तक के अपराध के आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि इस सरकार ने अपराधियों की लगाम कसी है, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि बड़े आपराधिक मामलों में महज कुछ फीसदी की ही गिरावट ये सरकार ला सकी है.

0

लखनऊ: 2017 में जब विधानसभा चुनाव होने थे, तो सबसे बड़ा मुद्दा अखिलेश यादव की सरकार में 5 साल तक लगातार बढ़ता रहा अपराध का ग्राफ था. इस मुद्दे को भुनाकर बीजेपी ने यूपी में प्रचंड बहुमत हासिल किया. दरअसल, पहले लोग कल्याण सिंह की सरकार के दौर में देख चुके थे कि बीजेपी हमेशा अपराधियों को उनके सही ठिकाने पहुंचाती है. यानी एनकाउंटर में मौत के घाट उतारना और जेल भेजना. योगी आदित्यनाथ की सरकार से भी लोगों ने खूब उम्मीद लगा रखी थी कि वो कानून और व्यवस्था की हालत दुरुस्त करेंगे, लेकिन शुक्रवार देर रात लखनऊ में एक युवक की पुलिसवालों ने गोली मारकर हत्या कर दी, इससे आम लोगों की बची-खुची उम्मीदें भी चकनाचूर हो रही हैं.

ये भी पढ़ें: चेकिंग के नाम पर पुलिस ने एप्‍पल के एरिया मैनेजर को मारी गोली

काहे की सख्ती है सरकार ?

सूबे की राजधानी लखनऊ में महज गाड़ी लड़ जाने पर अगर सिपाही गुंडों का रूप धर सकते हैं और एक आम इंसान को मौत के घाट उतार सकते हैं, तो बाकी जिलों का हाल समझा जा सकता है. कोई दिन ऐसा नहीं बीतता, जब यूपी के किसी हिस्से से बड़े वारदात की जानकारी नहीं मिलती है. कानून और व्यवस्था की खराब हालत की बानगी बीते दिनों हमीरपुर में देखी गई. यहां कंस वध मेले के दौरान जमकर उपद्रव हुआ. हर बार योगी सरकार कहती है कि हम अपराधियों पर सख्त हैं, लेकिन लखनऊ में पुलिस की गोली से युवक की हुई हत्या बता रही है कि सरकार किन पर सख्त है.

ये भी पढ़ें: घटना से कुछ देर पहले विवेक ने पत्नी से कहा था, ‘सना को छोड़कर आ रहा हूं’

आंकड़े खोल रहे योगी सरकार की पोल

बीते दिनों अफसरों ने 1 जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2018 तक के अपराध के आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि इस सरकार ने अपराधियों की लगाम कसी है, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि बड़े आपराधिक मामलों में महज कुछ फीसदी की ही गिरावट ये सरकार ला सकी है. नीचे दिए आंकड़े अपराध रोकने में नाकाम योगी सरकार की पोल खोल रहे हैं.

ये भी पढ़ें: विवेक हत्याकांड: पुलिस की थ्योरी पर सवाल

-2016 में डकैती की 149 घटनाएं हुई थीं. 2017 में ये आंकड़ा 151 का था. 2018 में जुलाई तक डकैती की 94 घटनाएं हो चुकी थीं.

-2016 में लूट की 2307 घटनाएं हुईं. 2017 में 2460 और 2018 में जुलाई तक लूट की 1986 घटनाएं हो चुकी थीं.

-हत्या की बात करें, तो 2016 में 2766 घटनाएं हुईं थीं. 2017 में 2562 और 2018 जुलाई तक 2505 हत्या की वारदात हुईं.

-बलवा की 2016 में 4513, 2017 में 5505 और 2018 जुलाई तक 5077 घटनाएं हुईं.

-फिरौती के लिए अपहरण की 2016 में 33, 2017 में 28 और 2018 जुलाई तक 21 घटनाएं दर्ज हुईं.

-दहेज के मामलों में मौत की 2016 में 1518, 2017 में 1449 और 2018 जुलाई तक 1498 घटनाएं हुईं.

-बलात्कार की बात करें, तो 2016 में 2041, 2017 में 2614 और 2018 जुलाई तक 2444 घटनाएं हो चुकी थीं.

-यानी 2016 में अपराध की कुल 1,55,970 घटनाएं, 2017 में 1,78914 घटनाएं और 2018 जुलाई तक अपराध की 1,96707 घटनाएं हो चुकी थीं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here