मीटिंग में लड़ पड़े दिग्विजय और सिंधिया, विवाद सुलझाने के लिए राहुल को करना पड़ा ये काम

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फाइल

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख धीरे-धीरे करीब आ रही है। पार्टियों में टिकट को लेकर माथापच्ची और तेज हो गई है। टिकट बंटवारे को लेकर गोलबंदी और खेमेबाजी की ख़बर कांग्रेस पार्टी से आ रही है। जहां इस विधानसभा चुनाव में राहुल की टीम से बाहर चल रहे दिग्विजय सिंह करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक के दौरान भिड़ गए। ये सब उस वक्त हुआ जब राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं से साथ बैठक कर रहे थे। दोनों नेताओं के बीच हुई इस झड़प के बाद कांग्रेस ने एक कमेटी गठित कर दोनों के बीच विवाद खत्म कराने की जिम्मेदारी दी है।

राहुल के सामने तू-तू, मैं-मैं

बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पैराशूटर्स को टिकट नहीं देने के फैसले को दोहराया है। ऐसे में अब जो नेता यहां-वहां से आए थे, उनके टिकट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। टिकट को लेकर बुधवार शाम को कांग्रेस ने केंद्रीय चुनाव समिति बैठक बुलाई थी। बैठक अपने मुकाम तक पहुंचती इससे पहले ही जमकर बवाल हो गया।

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करीबियों को दिलाना चाहते थे टिकट

बैठक में अपने करीबियों को टिकट दिलाने के लिये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया आपस में भिड़ गए। बात इतनी बढ़ गई कि राहुल के समझाने पर भी कोई सुनने के तैयार नहीं था। दोनों के बीच कहासुनी और पुराने मुद्दों पर हुई, दोनों एक दूसरे को खूब खरी-खोटी सुनाई। दोनों के बीच विवाद सुलझाने के लिए राहुल को तीन सदस्यीय समिति बनानी पड़ी। विवाद सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। जिसमें अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल को रखा गया है।

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सारी रात जागते रहे कांग्रेसी

दरअसल कांग्रेस पार्टी के वॉररूम दिल्ली के 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड में रात 2.30 बजे तक मामले को सुलझाने के लिए बैठक की। विवाद के बाद सभी नेताओं को इस मामले में बोलने से मना कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो अपने विवादित बयानों के चलते चर्चाओं में रहने वाले दिग्विजय से राहुल बेहद खफा है। जिसका खामियाजा दिग्विजय को उठाना पड़ सकता है।

वीडियो से हो चुकी है किरकिरी

आपको बता दें कुछ दिन पहले दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें दिग्विजय ने कहा ‘मेरे भाषणों से कांग्रेस का वोट कटता है, इसलिए वह चुनाव प्रचार करने नहीं जाते’ वीडियो में दिग्विजय साफ शब्दों में कार्यकर्ताओं से कह रहे है, देखो, ख्वाब देखते रह जाओगे अगर काम नहीं किया तो। जिसको टिकट मिले, चाहे दुश्मन को मिले, उसे जिताओ। और मेरा काम केवल एक है- कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं। मेरे भाषण देने से तो कांग्रेस के वोट कटते हैं। इसलिए मैं कहीं प्रचार के लिए जाता ही नहीं।

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