शायद वाजपेयी के अंतिम संस्कार के लिए सिद्धू का रुकना जरूरी था

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नई दिल्ली: वैसे तो यह नवजोत सिंह सिद्धू का व्यक्तिगत फैसला है मगर अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार के नाम पर अपनी पाकिस्तान यात्रा रद्द करने का उनके पास ठोस तर्क था. वह यह कि उन्हें राजनीति में अटल जी ही लाए थे और अटल जी के आदेश पर ही वो पहली दफा चुनावी मैदान में उतरे थे. यूं भी कह सकते हैं कि अटल जी के अंतिम संस्कार में शरीक होना किसी हद तक उनके लिए नैतिक तौर पर जरूरी था.

राजनीतिक हलकों में इसपर हैरत है कि कभी खुद को ‘वाजपेयी साब दा सिपाही’ (वाजपेयी साहब का सिपाही) बताने वाले सिद्धू ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होकर पाकिस्तान जाना मुनासिब क्यों समझा? इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह से जो तस्वीरें सामने आयी हैं, उनको लेकर सिद्धू की सोशल मीडिया पर मजम्मत हो रही है. इन तस्वीरों में सिद्धू पाक अधिकृत कश्मीर के प्रेसीडेंट के साथ वह समारोह में बैठे दिख रहे हैं तो शपथ ग्रहण में वो बहुत गर्मजोशी के साथ पाक सेना प्रमुख जनरल बाजवा से गले भी मिले. बीजेपी सिद्धू की इस ‘हरकत’ के लिए कांग्रेस से माफ़ी की मांग कर रही है.
बहरहाल, बात साल 2004 की है जब इंडो-पाक क्रिकेट सीरीज में कमेंटरी असाइनमेंट पूरा करके भारत लौटे सिद्धू ने बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की थी लेकिन चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। वह अटल बिहारी वाजपेयी ही थे जिनकी एक कॉल पर सिद्धू ने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था। इस सीट से छह बार सांसद रह चुके कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया को सिद्धू ने हराया भी था। उस समय हर रैली में सिद्धू खुद को गर्व से ‘वाजपेयी साब दा सिपाही’ बताते थे। 2007 में अमृतसर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में वाजपेयी ने सिद्धू के समर्थन में अपना आखिरी भाषण दिया था। यह उनकी आखिरी जनसभा थी जिसमें खराब सवास्थ्य के बावजूद वह पार्टी उम्मीदवार सिद्धू का प्रचार करने खासतौर पर गए थी।
वाजपेयी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बजाय पाकिस्तान जाने के सिद्धू के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब बीजेपी प्रवक्ता राजेश हनी ने आरोप लगाया, ‘वह न केवल सबसे संवेदनहीन हैं बल्कि एक मौकापरस्त इंसान भी हैं। वह इंटरनैशनल मीडिया से मिलने वाले फुटेज को देखते हुए उस तथ्य को भूल गए कि वह वाजपेयी ही थे जो उन्हें राजनीति में लाए थे और आज उनका अंतिम संस्कार था।’ वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुग ने कहा, ‘सिद्धू को फैसला लेने से पहले दो बार सोचना चाहिए। न सिर्फ वाजपेयी की अंतिम यात्रा के लिए जिन्हें वह अपना राजनीतिक गॉडफादर बताते थे बल्कि पाकिस्तान हमारे जवानों पर जो बॉर्डर कर रहा है, उसका भी ध्यान रखना चाहिए था।’

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