आपसी कलह में घिरी देश की शीर्ष जांच एजेंसी

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नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो के दूसरे नंबर के उच्चाधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज हुआ है. उनपर आरोप है कि उन्होंने मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच में ढील बरतने के एवज में रिश्वत ली थी. राकेश अस्थाना पर व्यापारी सतीश साना की शिकायत को आधार बनाकर 15 अक्तूबर को मामला दर्ज हुआ था. बता दें कि मांस कारोबारी मोईन पर 2017 से जांच चल रही थी जिससे रिश्वत लेकर सीबीआई के विशेष अधिकारी ने कथित रूप से क्लीन चीट दिलाने में मदद की थी.

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वहीं सीबीआई ने 16 अक्तूबर को विभाग के बिचौलिया समझे जाने वाले मनोज प्रसाद को भी गिरफ्तार किया था. सीबीआई की यही विशेष टीम अगस्तावेस्ट हेलिकॉप्टर घोटाला, विजया माल्या केस और लालू यादव से जुड़े रेलवे टेंडर घोटाला और चारा घोटाला की जांच कर रही है. लालू यादव, उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत 16 लोगों पर चल रही जांच प्रक्रिया पर समाजसेवी व्यंकटेश कुमार शर्मा ने एक पीआईएल के जरिये सवालिया निशान खड़े किये हैं. शर्मा ने अदालत में अपना पक्ष रखा है कि सीबीआई और ईडी रेलवे टेंडल घोटाला मामले की जांच में कोताही बरत रही है. जिसपर कोर्ट ने सीबीआई को भी फटकार लगाई थी. इन सब प्रक्रियाओं को देखते हुए इन रिपोर्टों में कुछ काला तो जरूर नजर आता है.

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वहीं सूत्रों के मुताबिक अस्थाना ने कैबिनेट सचिव को 24 अगस्त को डिटेल्ड लेटर के माध्यम से वर्मा के खिलाफ कथित 10 मामले बताए थे. इन सब प्रकरणों को देखते हुए अंदाज लगाया जा सकता है कि सीबीआई में शीर्ष स्तर पर जंग छिड़ी हुई है और सभी अधिकारियों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है.

राहुल ने मोदी सरकार को ठहराया दोषी 

अस्थाना के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज करने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को जांच एजेंसी की विश्वसनीयता और ईमानदारी पर सवाल उठने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को दोषी ठहराया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोदी की सरकार में सीबीआई राजनीतिक बदला लेने वाला हथियार बन गई है.

 

राहुल ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री के चहेते, गुजरात कैडर के अधिकारी, गोधरा पर गठित एसआईटी से प्रसिद्धि में आए और सीबीआई में नंबर दो के रूप में घुसाए गए अधिकारी को अब रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है.”

उन्होंने कहा, “इन प्रधानमंत्री के शासन में सीबीआई राजनीतिक बदला लेने का हथियार बन गई है. एक संस्थान जो गर्त में जा रहा है, खुद से लड़ रहा है.”

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