महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच मुकाबला सिर्फ राजनीतिक ताकत तक सीमित नहीं है। पार्टियों को मिलने वाले चंदे के आंकड़े भी एक बड़ी तस्वीर पेश कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्वाचन आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को करीब 139.92 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसके मुकाबले उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को लगभग 1.25 करोड़ रुपये और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को करीब 1.50 करोड़ रुपये मिले। यानी घोषित चंदे के मामले में शिंदे की पार्टी दोनों ठाकरे भाइयों की पार्टियों से काफी आगे रही।
तीनों दलों की ओर से दाखिल आंकड़े राजनीतिक दलों की वित्तीय स्थिति और उनके लिए योगदान देने वाले लोगों व संस्थाओं की जानकारी देते हैं। हालांकि, चंदे की रकम से किसी पार्टी की चुनावी जीत या लोकप्रियता का सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि घोषित राजनीतिक चंदे के मामले में तीनों दलों के बीच कितना बड़ा अंतर है।
शिंदे की शिवसेना को ठाकरे भाइयों से कितना ज्यादा चंदा मिला?
निर्वाचन आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 139.92 करोड़ रुपये का योगदान मिला। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने लगभग 1.25 करोड़ रुपये और राज ठाकरे की MNS ने 1,49,81,000 रुपये यानी करीब 1.50 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया।
इन आंकड़ों के हिसाब से शिंदे की पार्टी को उद्धव ठाकरे की पार्टी से करीब 112 गुना ज्यादा चंदा मिला। राज ठाकरे की पार्टी के मुकाबले यह रकम लगभग 93 गुना अधिक है।
अगर दोनों ठाकरे भाइयों की पार्टियों के चंदे को जोड़ दिया जाए, तो कुल रकम करीब 2.75 करोड़ रुपये होती है। इसके मुकाबले शिंदे की शिवसेना को लगभग 51 गुना ज्यादा चंदा मिला।
यह अंतर राजनीतिक दलों के घोषित वित्तीय योगदान में बड़ा फर्क दिखाता है। हालांकि, इसे समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े रिपोर्ट में घोषित योगदान से संबंधित हैं। केवल चंदे के आधार पर किसी पार्टी के जनसमर्थन या राजनीतिक प्रभाव का आकलन करना सही नहीं होगा।
शिंदे की पार्टी को किन क्षेत्रों से मिला बड़ा योगदान?
शिंदे की शिवसेना की रिपोर्ट में बड़े योगदानकर्ताओं के तौर पर कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन बड़े योगदानों का कुल मूल्य 75 करोड़ रुपये है।
इसका मतलब है कि पार्टी को मिले कुल 139.92 करोड़ रुपये के घोषित चंदे में से लगभग 53.6 प्रतिशत रकम इन तीन योगदानों से आई। यानी कुल चंदे का आधे से अधिक हिस्सा सिर्फ तीन बड़े योगदानों से जुड़ा था।
रिपोर्ट में HOABL मैनेजमेंट, एसबी इन्फोकैश और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ी अन्य कंपनियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। योगदान देने के लिए चेक, डिमांड ड्राफ्ट और RTGS जैसे भुगतान माध्यमों का उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक दलों के वित्तीय ब्योरे में बड़े योगदानकर्ताओं की जानकारी इसलिए अहम होती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि घोषित चंदे में किन कंपनियों या संस्थाओं की कितनी हिस्सेदारी है। हालांकि, किसी कंपनी की ओर से चंदा दिए जाने मात्र से उसके बदले राजनीतिक लाभ मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना को कहां से मिला पैसा?
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 1.25 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया। पार्टी की रिपोर्ट में जुनिपर होटल्स, जो ग्रैंड हयात से जुड़ी कंपनी है, अजिमा मैनर प्राइवेट लिमिटेड और म्यूचुअल ग्रोथ फंड जैसे नाम शामिल हैं।
हालांकि, पार्टी को मिले कुल घोषित चंदे की तुलना में यह रकम शिंदे की शिवसेना के आंकड़े से काफी कम है। दोनों दलों के बीच यह अंतर महाराष्ट्र की राजनीति में चंदे के वित्तीय पहलू को चर्चा में लाता है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला घोषित चंदा उनकी आय के अलग-अलग स्रोतों में से एक है। किसी पार्टी की पूरी आर्थिक स्थिति समझने के लिए उसकी अन्य आय, खर्च और उपलब्ध वित्तीय विवरणों को भी देखना पड़ता है।
राज ठाकरे की MNS को मिला करीब डेढ़ करोड़ रुपये का चंदा
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अपनी रिपोर्ट में 1,49,81,000 रुपये का योगदान घोषित किया है। यह रकम करीब 1.50 करोड़ रुपये बैठती है।
MNS की रिपोर्ट में सारस्वत कंस्ट्रक्शन, पायनियर हाउसिंग और स्थानीय संस्थाओं तथा समर्थकों से मिले योगदान का उल्लेख है। इस तरह पार्टी के घोषित चंदे में कंपनियों के साथ अन्य योगदानकर्ताओं की भी भूमिका रही।
निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों की ओर से जमा की जाने वाली फॉर्म-24A रिपोर्ट में आम तौर पर 20,000 रुपये से अधिक के योगदान का ब्योरा दिया जाता है। इससे बड़े योगदानकर्ताओं की जानकारी सामने आती है और राजनीतिक चंदे को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलती है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 के घोषित आंकड़ों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना चंदे के मामले में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों से काफी आगे दिखाई देती है। हालांकि, यह वित्तीय योगदान का तुलनात्मक आंकड़ा है, न कि चुनावी प्रदर्शन का पैमाना। राजनीतिक ताकत का आकलन करने के लिए जनसमर्थन, संगठन, चुनावी नतीजों और अन्य कारकों को भी देखना होगा।
