सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो सावधान, ऐसा करने वाले 50 लोग जा चुके हैं जेल

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया के जरिए समुदायों के बीच टकराव बढ़ाने वाले पोस्ट और नेताओं पर अभद्र टिप्पणियां करने वालों के लिए सावधान होने का वक्त आ गया है. आंकड़ों के मुताबिक 2017 और 2018 में अब तक कुल 50 लोग ऐसे मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं.

इनमें से कुछ को छह महीने, कुछ को एक महीने और कुछ को एक हफ्ते तक जेल की सलाखों के पीछे वक्त गुजारना पड़ा है. हाल ही में जेल जाने वालों की सूची में 5 और लोगों का नाम जुड़ा. ये सभी मुसलमान हैं और 15 नवंबर को सभी की गिरफ्तारी आईटी एक्ट के तहत की गई थी. इन सभी पर आरएसएस और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है.

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जिन लोगों को आईटी एक्ट के तहत बीते एक साल में गिरफ्तार किया गया, उनमें से ज्यादातर गरीब तबके के और अनपढ़ हैं. गिरफ्तार होने वालों में से आधे मुसलमान हैं. इनमें से ज्यादातर ने कुछ वक्त पहले ही इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू किया था. आईटी एक्ट के तहत सोशल मीडिया में गलत जानकारी देने और नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों के मामले सबसे ज्यादा हैं.

सोशल मीडिया के दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार लोगों पर दो समुदायों के बीच घृणा बढ़ाने की कोशिश की धारा 153-ए, राष्ट्रीय एकता को खतरा यानी 153-बी, धार्मिक भावना भड़काने की धारा 295 के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई गई है. इस धारा के तहत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अभद्र कंटेंट फैलाना आता है.

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दोष साबित होने पर इन सभी पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना और 3 साल से लेकर उम्रकैद की सजा का प्रावधान इन धाराओं में है. बता दें कि सरकार ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए वाट्सएप और फेसबुक से कहा है. वाट्सएप ने इसके लिए फेक न्यूज पहचानने संबंधी विज्ञापन अखबारों में दिए हैं. साथ ही कंपनी अब टीवी, फेसबुक, यू-ट्यूब और सिनेमाहॉलों में 60 सेकेंड की विज्ञापन फिल्में भी चलाने जा रही है.

बता दें कि बीते एक साल में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की तादाद में 20 से 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. लोकनीति-सीएसडीएस ने मूड ऑफ द नेशन नाम के सर्वे में ये बात कही है. मोबाइल लेने वाले सबले पहले सोशल मीडिया के एप ही डाउनलोड करते हैं. देश के 18 से 25 साल के युवाओं में से आधे के मोबाइल में वाट्सएप है.

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