‘देह तो झुलसी लेकिन सपने उजले हो गए’, ऐसी है लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल
फाइल फोटो

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी की कहानी जल्द ही बड़े पर्दे पर दिखेगी। फिल्म का नाम है ‘छपाक’। इसकी शूटिंग भी पिछले दिनों ही शुरू हुई हैं। फिल्म में लक्ष्मी का किरदार एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण निभाने वाली है और फिल्म को मेघना गुलजार डायरेक्ट कर रही हैं। फिल्म ‘छपाक’ के चलते इन दिनों लक्ष्मी अग्रवाल लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। लक्ष्मी का मानना है कि फिल्म आने से समाज में शायद एक बहुत बड़ा बदलाव आए। उनका कहना है कि जिस शख्स ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंका, उसकी तो नहीं हुईं लेकिन आज वह पूरी दुनिया की हैं। तो आज हम आपको मिलाते हैं देश के लिए मिसाल बनी लक्ष्मी अग्रवाल से।

कहानी लक्ष्मी अग्रवाल की

ये कहानी है एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की। लक्ष्मी अब सेलिब्रिटी बन चुकी हैं। वे रविवार को इंदौर में एक फैशन शो में भाग लेने आई थीं। लक्ष्मी अग्रवाल का जन्म 1 जून 1990 में दिल्ली के एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। उनके परिवार में उनके माता-पिता और एक भाई था। लक्ष्मी दिल्ली की खान मार्केट में एक किताब की दुकान पर बतौर असिस्टेंट काम कर चुकी हैं। वह एक एसिड अटैक सर्वाइवर है और एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों के लिए बोलती है। लक्ष्मी ने अपने करियर की शुरुआत स्टॉप एसिड अटैक्स अभियान के साथ की थी। उसने शुरुआती दिनों में एक अभियान समन्वयक के रूप में काम किया। जल्द ही, लक्ष्मी दुनिया भर में एसिड हमलों से बचे लोगों की आवाज बन गई। एसिड की बिक्री पर अंकुश लगाने और अपनी नींव के माध्यम से एसिड हमलों से बचे लोगों के पुनर्वास के लिए उन्हें भारत में कई पुरस्कार मिले। अब लक्ष्मी ने खुद का अभियान StopSaleAcid शुरू किया। जून 2014 तक लक्ष्मी ने न्यू एक्सप्रेस में एक टेलीविजन शो, उड़ान को भी होस्ट किया हैं।

महिला और बाल विकास मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय और उनके अभियान स्टॉप सेल एसिड के लिए यूनिसेफ से अंतर्राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण पुरस्कार 2019 मिला। वह छन्न फाउंडेशन की पूर्व निदेशक भी हैं, जो भारत में एसिड हमलों से बचे लोगों की मदद के लिए समर्पित एक गैर सरकारी संगठन है। लक्ष्मी को यूएस फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा द्वारा 2014 का अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान पुरस्कार मिला। उन्हें एनडीटीवी इंडियन ऑफ़ द ईयर के रूप में भी चुना गया था।

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल
एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल

कब हुआ था अटैक

लक्ष्मी पर एसिड अटैक 2005 में हुआ था उस समय उनकी उम्र 15 साल थी। वह 7वीं कक्षा में पढ़ती थी। और वह दिल्ली के खान मार्केट में एक किताब की दुकान पर बतौर असिस्टेंट काम करती थीं। उस वक्त उनसे दोगुना बड़े एक व्‍यक्ति ने उन्हें शादी के लिये प्रपोज किया। लेकिन लक्ष्‍मी ने उसे इंकार कर दिया। इसके बाद 22 अप्रैल 2005 को सुबह करीब 11 बजे दिल्ली के खान मार्केट में वो युवक अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ आया और उसे धक्‍का दे दिया। धक्‍का लगते ही लक्ष्‍मी सड़क पर गिर गई और उस युवक ने उन पर ऊपर तेजाब फेंक दिया।

लक्ष्मी ने बताया कि, प्लास्टिक पिघलते देखा होगा आप सभी ने। उसी तरह मेरी चमड़ी पिघल रही थी। मेरे सिर पर जैसे कई पत्थर रख दिए थे किसी ने। सड़क पर आती जाती गाड़ियों से मैं टकरा रही थी। अस्पताल में जब रोते हुए अपने पिता के गले लिपटी तो मेरे छूने से उनकी शर्ट जगह-जगह से जल गई। मैं होश में थी और मेरी आंखें सिल रहे थे डॉक्टर्स। मुझे तो अंदाज़ा भी नहीं था कि मेरे साथ आखिर हुआ क्या है। लक्ष्मी ने बताया कि कई सर्जरीज़ और ढाई महीने बाद जब मैं घर लौटी तो देखा कि घर से सारे आईने हटा दिए गए हैं। फिर भी मैंने किसी तरह अपना चेहरा देख ही लिया। कुछ ही समय में मैंने तय कर लिया था कि मुझे खुद को खत्म कर लेना है। फिर मुझे माता पिता के आंसू याद आए जो मेरे झुलसे हुए शरीर पर पड़ रहे थे उस वक्त। उनके लिए ही सही, लेकिन मैंने आत्महत्या नहीं की। हालांकि ज़िंदगी आसान नहीं थी।

अटैक के बाद जीना आसान नहीं था

लक्ष्मी ने बताया कि “लोग मेरा चेहरा देख मुंह फेर लेते या बेचारी कहकर आगे बढ़ जाते। कुछ लोगों ने कहा चेहरा हमेशा ढंककर रखा करो। बहुत डरावनी लगती हो तुम। छोटे बच्चे डर जाते हैं तुम्हें देखकर। एक नहीं, कई बार झुलसी मैं इस अपमान से। लेकिन आज मैं सबसे ज्यादा शुक्रगुज़ार उन्हीं लोगों की हूं जिन्होंने मुझे अपमानित किया। घृणा से देखा। आज मैं जो भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं। उस अपमान ने मुझे एक ऐसी ज़िद से भर दिया था कि अब तो कुछ करके दिखाना है। अपमान का जवाब अपने काम से देने की चाहत ने मुझे खुद को खत्म नहीं करने दिया। इसलिए साथ न देने वालों को तह-ए-दिल से शुक्रिया। एक बार उस शख़्स से भी मिलूंगी जिसकी तेज़ाबी मानसिकता से मेरी देह झुलसी लेकिन मेरे सपने और उजले हो गए।“

पर्सनल लाइफ में लिए कई बोल्ड फैसले

आपको बता दें कि लक्ष्मी ने पर्सनल लाइफ में काफी बोल्ड फैसले लिए हैं। 2014 में उन्हें एसिड अटैक के लिए अभियान चला रहे आलोक दीक्षित के साथ प्यार हुआ। लेकिन दोनों ने शादी करने की बजाय लिव-इन में रहने का फैसला किया। लक्ष्मी के इस फैसले से घर वालों ने भी उनका साथ दिया। दोनों की एक बच्ची भी है, जिसका नाम पीहू हैं। लेकिन तीन साल पहले दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अलग होने के बाद लक्ष्मी ने अपनी बेटी के साथ आलोक का घर छोड़ दिया।

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